Robotic Mules: एलओसी की निगरानी पर पहुंचा रोबोटिक म्यूल, अब आतंकियों की खैर नहीं, जानें इसकी खासियत

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Robotic Mules: एलओसी पर भारतीय सेना उन्नत तकनीक और स्वदेशी हथियारों के दम पर हर खतरे से निपटने के लिए तैयार है. इसी कड़ी में रोबोटिक म्यूल भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ा रहा है. इसके जरिए सेना एलओसी में किसी भी आतंकवादी हरकत को तुरंत नाकाम करने में ज्यादा सक्षम हो रहे हैं. यह म्यूल मिनी ड्रोन, सेंसर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों के दम पर दुर्गम इलाकों में भी सैनिकों की मदद करने में सक्षम है.

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Robotic Mules: भारत की सेना की ताकत में इजाफा होता जा रहा है. सेना हर दिन नए-नए उपकरणों से लैस हो रही है. इसी कड़ी में जम्मू कश्मीर के सुंदरबनी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (MULE) ने सेना के जवानों के साथ चहलकदमी की. रोबोटिक म्यूल के आने से सेना की ताकत कई गुणा बढ़ गई है. इसके जरिए सेना एलओसी में किसी भी आतंकवादी हरकत को तुरंत नाकाम करने में ज्यादा सक्षम हो रहे हैं. यह म्यूल मिनी ड्रोन, सेंसर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों के दम पर दुर्गम इलाकों में भी सैनिकों की मदद करने में सक्षम है.

वीडियो में दिख रही हैं खूबियां

जम्मू और कश्मीर के सुंदरबनी में नियंत्रण रेखा के पास सेना के जवानों के साथ एक रोबोटिक म्यूल दिखाई दे रहा है. उपकरणों से लैस यह म्यूल आस पास के इलाकों की टोह लेता नजर आ रहा है. म्यूल को खूबियों का जिक्र करते हुए सेना ने बताया कि स्वदेशी विकसित रोबोटिक म्यूल जंगल के दुर्गम इलाकों में सेना के लिए रसद ले जाने के अलावा विस्फोटकों की पहचान कर सकता है. इसके अलावा यह निगरानी में मदद कर सकता है.

थर्मल कैमरों और सेंसरों से लैस हैं म्यूल

रोबोटिक म्यूल की खूबियों में कई चीजें शामिल हैं. ये थर्मल कैमरों और सेंसरों से लैस होते हैं. यह 30 किलोग्राम तक का वजन उठा सकते हैं. सबसे बड़ी बात की ये म्यूल दुर्गम से दुर्गम इलाकों में बड़े आराम से आवाजाही कर सकते हैं. यह रोबोटिक म्यूल सेना की ताकत को काफी बढ़ा रहे हैं. उइकी उच्च तकनीक और सेंसर से बड़े बड़े आतंकी और उनके हथियार नाकाम हो जाएंगे.

रोबोटिक म्यून काफी उपयोगी

रोबोटिक म्यून कठिन इलाकों में सैनिकों के लिए रसद और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाने में पूरी तरह सक्षम है. इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और इन्फ्रारेड तकनीक लगी होती है. इससे ये निगरानी और वस्तुओं की पहचान बड़े आराम से कर लेते हैं. रोबोटिक म्यून खतरनाक या दुर्गम स्थानों में भी काम कर सकता है, जिससे सैनिकों की जान बचाई जा सकती है.

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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