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Watch Video : जेल से बाहर निकलते ही अर्णब गोस्वामी का उद्धव सरकार के खिलाफ 'हल्ला बोल'

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Arnab Goswami released
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Arnab Goswami released : सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के कुछ घंटे बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्णब गोस्वामी रायगड जिला स्थित तलोजा जेल से रिहा कर दिए गए. जेल से बाहर आने के बाद अर्णब खुली गाड़ी में माइक पकड़े नजर आये. उन्होंने उस दौरान वंदे मातरम के नारे भी लगाये. जेल के बाहर भारी संख्या में अर्णब के समर्थक जमा थे. भारी भीड़ के बीच अर्णब अपने पुराने रंगत में नजर आये. मालूम हो शीर्ष अदालत ने अर्णब गोस्वामी के साथ ही इस मामले में दो अन्य व्यक्तियों-नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख -को भी 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया.

मालूम हो उन्हें एक इंटीरियर डिजाइनर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के वर्ष 2018 के एक मामले में गत चार नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. गोस्वामी रात लगभग साढ़े आठ बजे जेल से बाहर आए. जेल के बाहर जुटे लोगों का उन्होंने वाहन में से हाथ हिलाकर अभिवादन किया.

उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आभारी हैं. गोस्वामी ने विजय चिह्न प्रदर्शित करते हुए कहा, यह भारत के लोगों की जीत है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले आज उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान करते हुए कहा कि यदि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कमतर किया जाता है तो यह न्याय का उपहास होगा.

कोर्ट ने क्या कहा

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिये उच्चतम न्यायालय है. पीठ ने इन्हें यह निर्देश भी दिया कि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे. पीठ ने अपने तीन पेज के आदेश में कहा कि बंबई उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में गोस्वामी और इन दो व्यक्तियों की अंतरिम जमानत की अर्जी अस्वीकार करना ‘गलत था.

पीठ ने आदेश में कहा, हमारी सुविचारित राय है कि उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम जमानत के लिये आवेदन अस्वीकार करना गलत था. हम तद्नुसार आदेश और निर्देश देते हैं कि अर्णब गोस्वामी, फिरोज मोहम्मद शेख ओर नीतीश सारदा को जेल अधीक्षक के समक्ष 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका भरने पर अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जायेगा.

न्यायालय ने आदेश में आगे कहा, हालांकि, उन्हें जांच में सहयोग करने और जांच में हस्तक्षेप करने या गवाहों के साथ हस्तक्षेप का कोई प्रयास नहीं करने का निर्देश दिया जाता है. संबंधित जेल प्राधिकारियों और रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश पर तुरंत अमल किया जाये.

Posted By - Arbind Kumar Mishra

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