नृपेंद्र मिश्रा ने कहा- राम मंदिर चंदा विवाद की जांच के लिए एसआईटी गठित करना सरकार की सक्रियता
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 14 Jun 2026 3:05 PM
राम मंदिर
Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर के चंदे में घपले की खबर के तूल पकड़ने के बाद इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है. इस एसआईटी में तीन सदस्य हैं, जो गड़बड़ी की रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर सौंपेंगे. आरोप है कि दानपत्र से गलत तरीके से पैसा निकाला जा रहा था.
Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमिटी के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार के राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए एसआईटी (SIT) बनाने के फैसले का स्वागत किया और इसे एक अहम कदम बताया.
एसआईटी बनाना सरकार की सक्रियता
नृपेंद्र मिश्रा ने फैजाबाद सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि एसआईटी बनाना सरकार की सक्रियता को दिखाता है. उन्होंने कहा कि यह एक अहम कदम है. उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदे और फाइनेंशियल मैनेजमेंट से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी.
चंदा के पैसे में घपले का आरोप
अयोध्या के श्रीराम मंदिर को मिले दान में घपले का आरोप लगने के बाद मंदिर के ट्रस्ट ने सरकार से मामले की जांच का अनुरोध किया. ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन 13 जून को कर दिया है. एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन शामिल हैं. एसआईटी की टीम सात दिन में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगी. आरोप है कि दान पत्र से लगातार गलत तरीके से पैसा निकाला जा रहा था.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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