मानसून का कहर: हिमाचल में आफत की बारिश, बादल फटने से पूरा परिवार लापता, 10 महीने की बच्ची जिंदा बची

Rain Havoc
Rain Havoc: गांव में बादल फटा तब बच्ची के पिता रमेश कुमार अपने घर के अंदर घुस रहे पानी को रोकने की कोशिश कर रहे थे तभी बादल फटने से गांव में तबाही मच गई. उनका शव मलबे में मिला. इधर इससे बेखबर नितिका की मां राधा देवी और दादी पुर्णू देवी रमेश की तलाश में निकली थीं. लेकिन, बादल फटने के बाद से उन दोनों महिलाओं का अभी तक पता नहीं चल पाया है. पड़ोसी प्रेम सिंह ने बच्ची को अकेले रोते हुए देखा और उसे रमेश के चचेरे भाई बलवंत के पास ले गए.
Rain Havoc: देश भर में मानसून कहर बरपा रहा है. कई राज्यों में भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. मानसून की बारिश से हिमाचल प्रदेश का भी बुरा हाल है. राज्य के मंडी जिले के तलवारा गांव में बादल फटने की घटना सामने आई है. घटना में दस महीने की एक बच्ची के परिवार के तीन सदस्य या तो बह गए या उनकी मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि वह संभवत अपने परिवार की अकेली जीवित सदस्य रह गयी है.
मंगलवार को जब गांव में बादल फटा तब बच्ची के पिता रमेश कुमार अपने घर के अंदर घुस रहे पानी को रोकने की कोशिश कर रहे थे तभी बादल फटने से गांव में तबाही मच गई. उनका शव मलबे में मिला.
नहीं मिल रहा लापता लोगों का सुराग
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 10 महीने की बच्ची नितिका की मां राधा देवी और दादी पुर्णू देवी रमेश की तलाश में निकली थीं. लेकिन, बादल फटने के बाद से उन दोनों महिलाओं का अभी तक पता नहीं चल पाया है. पड़ोसी प्रेम सिंह ने बच्ची को अकेले रोते हुए देखा और उसे रमेश के चचेरे भाई बलवंत के पास ले गए. बलवंत पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के निजी सुरक्षा अधिकारी हैं. उन्होंने कहा कि उप-विभागीय मजिस्ट्रेट ने बच्ची के नाम पर बैंक खाता खोलने की पेशकश की है और यह खाता कल खोला जाएगा. बच्ची के चाचा बलवंत ने कहा “एसडीएम ने कहा कि बहुत सारी कॉल आ रही हैं और लोग इस त्रासदी के बारे में सुनने के बाद बच्ची की मदद के लिए आगे आ रहे हैं.”
बादल फटने के भयंकर तबाही
बादल फटने से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र पवारा, थुनाग, बैदशाड़, कंडा और मुराद हैं. इन सभी पंचायतों में भारी तबाही हुई है, जहां सड़क, पानी और बिजली योजनाओं को काफी नुकसान पहुंचा है. अधिकारियों ने बताया कि मंडी जिले में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की दस घटनाओं में अब तक चौदह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 31 लापता लोगों की तलाश जारी है. बलवंत ने बताया कि रमेश ने भी मात्र छह महीने की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. रमेश एक किसान था जिसकी कमाई अच्छी नहीं थी और घर के खर्च के लिए उसे पुर्नू देवी की तनख्वाह पर निर्भर रहना पड़ता था. पुर्नू देवी एक सरकारी स्कूल में चपरासी है और सात महीने में रिटायर होने वाली थी.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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