चुनावी रैली में बोले राहुल गांधी-राज्यों के खिलाफ साजिश कर रही थी सरकार, हमने नाकाम कर दिया

तमिलनाडु की चुनावी रैली में राहुल गांधी
Rahul Gandhi : महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर केंद्र की मोदी सरकार देश में परिसीमन करवाकर दक्षिणी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों की ताकत को कम करना चाहती थी, लेकिन हमने उनकी साजिश को नाकाम कर दिया है. तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह बातें कहीं.
Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तमिलनाडु में एक चुनावी रैली में कहा कि जब मैं आरएसएस और बीजेपी को तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति पर हमला करते हुए देखता हूं तो मैं वैसा ही महसूस करता हूं जैसा तमिलनाडु के लोग करते हैं. उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि ये लोग तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति पर हमला करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं.
तमिलनाडु की ताकत को कम करना चाहती है सरकार
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के नाम पर अपने गलत इरादों को देश पर थोपना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने रोक दिया है. राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी सरकार 16 अप्रैल को एक नया विधेयक लेकर आई और दावा किया कि वह महिला आरक्षण विधेयक पारित करने की कोशिश कर रही है, जबकि यह विधेयक पहले ही 2023 में पारित हो चुका है. दरअसल मोदी सरकार इस कोशिश में है कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन किया जाए और देश के संघीय ढांचे से छेड़छाड़ की जाए. यह तमिलनाडु की ताकत को कम करने की कोशिश थी. बीजेपी यह कोशिश कर रही थी कि दक्षिण के राज्यों और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों की ताकत को कम कर दिया जाए. इसी वजह से विपक्ष ने उनका साथ नहीं दिया और महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक गिर गया. हमने भारत की संघीय ढांचे की रक्षा के लिए इसे खारिज कराया.
भारत में हर राज्य की है अपनी आवाज
चुनावी रैली में राहुल गांधी ने कहा कि भारत राज्यों का एक संघ है. यहां हर राज्य की अपनी एक आवाज है, जिसे सुना जाना जाता है और उसे उसे दबाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हर राज्य का व्यक्ति खुद को अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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