चुनावी रैली में बोले राहुल गांधी-राज्यों के खिलाफ साजिश कर रही थी सरकार, हमने नाकाम कर दिया
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 18 Apr 2026 2:38 PM
तमिलनाडु की चुनावी रैली में राहुल गांधी
Rahul Gandhi : महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर केंद्र की मोदी सरकार देश में परिसीमन करवाकर दक्षिणी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों की ताकत को कम करना चाहती थी, लेकिन हमने उनकी साजिश को नाकाम कर दिया है. तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह बातें कहीं.
Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तमिलनाडु में एक चुनावी रैली में कहा कि जब मैं आरएसएस और बीजेपी को तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति पर हमला करते हुए देखता हूं तो मैं वैसा ही महसूस करता हूं जैसा तमिलनाडु के लोग करते हैं. उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि ये लोग तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति पर हमला करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं.
तमिलनाडु की ताकत को कम करना चाहती है सरकार
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के नाम पर अपने गलत इरादों को देश पर थोपना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने रोक दिया है. राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी सरकार 16 अप्रैल को एक नया विधेयक लेकर आई और दावा किया कि वह महिला आरक्षण विधेयक पारित करने की कोशिश कर रही है, जबकि यह विधेयक पहले ही 2023 में पारित हो चुका है. दरअसल मोदी सरकार इस कोशिश में है कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन किया जाए और देश के संघीय ढांचे से छेड़छाड़ की जाए. यह तमिलनाडु की ताकत को कम करने की कोशिश थी. बीजेपी यह कोशिश कर रही थी कि दक्षिण के राज्यों और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों की ताकत को कम कर दिया जाए. इसी वजह से विपक्ष ने उनका साथ नहीं दिया और महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक गिर गया. हमने भारत की संघीय ढांचे की रक्षा के लिए इसे खारिज कराया.
भारत में हर राज्य की है अपनी आवाज
चुनावी रैली में राहुल गांधी ने कहा कि भारत राज्यों का एक संघ है. यहां हर राज्य की अपनी एक आवाज है, जिसे सुना जाना जाता है और उसे उसे दबाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हर राज्य का व्यक्ति खुद को अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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