Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में नगर निगम के टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद करने का दिया निर्देश

Published by : Vinay Tiwari Updated At : 17 Dec 2025 6:57 PM

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शीर्ष अदालत ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया कि दिल्ली आने वाले 9 टोल प्लाजा के शुल्क वसूलने पर अस्थायी रोक लगाए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जयमाला बागची और न्यायाधीश विपुल पंचोली की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम को एक हफ्ते के अंदर टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद करने का निर्देश दिया.

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Pollution: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है. संसद में भी इस मामले पर चिंता जाहिर की जा चुकी है और प्रदूषण से निपटने के उपायों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है. वहीं अदालत में भी प्रदूषण के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया कि दिल्ली आने वाले 9 टोल प्लाजा के शुल्क वसूलने पर अस्थायी रोक लगाए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जयमाला बागची और न्यायाधीश विपुल पंचोली की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली नगर निगम को एक हफ्ते के अंदर टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद करने का निर्देश दिया. 


पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि टोल प्लाजा के कारण दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को घंटों जाम का सामना करना होता है और इससे प्रदूषण की स्थिति और खराब हो रही है. पीठ ने नगर निगम को इस बाबत एक हफ्ते के अंदर टोल प्लाजा को अस्थायी तौर पर बंद करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया. साथ ही पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह इस संभावना पर विचार करें कि दिल्ली नगर निगम द्वारा संचालित 9 टोल प्लाजा का कामकाज वह कैसे कर सकती है. अस्थायी तौर पर टोल प्लाजा बंद होने होने से आर्थिक नुकसान की भरपाई कैसे नगर निगम को की जा सकती है. पीठ ने यह निर्देश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की याचिका पर दिया. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्र में जाम की वजह नगर निगम के टोल प्लाजा हैं.  


प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति बनाने की जरूरत

शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है और इससे निपटने के लिए व्यापक दीर्घकालीन नीति बनाना जरूरी है और तय समय में नीति पर क्रियान्वयन होना चाहिए. अदालत ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को शहरों में परिवहन की व्यवस्था, स्वच्छ ईंधन के प्रयोग, पराली को लेकर किसानों को संवेदनशील बनाने और पराली प्रबंधन पर जोर देने, निर्माण काम के लिए नियम बनाने और निर्माण काम बंद होने के दौरान कामगारों को मुआवजा देने और घरों से होने वाले प्रदूषण को रोकने पर गंभीरता से विचार करने को कहा.सुनवाई के दौरान स्कूलों को बंद करने का मामला भी उठा. 

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि प्रदूषण के कारण कक्षा 5 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं और इससे बच्चों की मिड-डे मील योजना प्रभावित हो रही है. गरीब परिवार के अभिभावक सड़कों पर काम कर आजीविका चला रहे हैं. क्या दिल्ली में बंद स्कूलों से अच्छी हवा घरों में मिल रही है. हाइब्रिड मोड में स्कूल संचालन से सिर्फ अमीर परिवार के बच्चों को लाभ हो रहा है. इसपर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह तर्क उचित नहीं है. सरकार की ओर से  अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से स्थिति काफी खराब है. प्रदूषण से निपटने के लिए सड़कों पर भीड़ कम करने के उपाय किए गए है. 

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