POCSO Case: ‘आई लव यू कहना यौन उत्पीड़न नहीं,’ बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO मामले में व्यक्ति को किया बरी

Bombay High Court
POCSO Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है. जिसमें कोर्ट ने कहा, ‘आई लव यू’ कहना यौन इरादे का सबूत नहीं है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO मामले में व्यक्ति को बरी भी कर दिया.
POCSO Case: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने बुधवार को एक 25 साल के शख्स को बरी कर दिया, जो 2015 में एक नाबालिग लड़की को ” आई लव यू ” कहकर छेड़ने के आरोप में दोषी ठहराया गया था. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया.
निचली अदालत ने शख्स को सुनाई थी 3 साल जेल की सजा
नागपुर सत्र न्यायालय ने व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-ए (यौन उत्पीड़न) और 354डी (पीछा करना) तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 8 के तहत तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी. निचली अदालत ने माना था कि उसके शब्द यौन इरादे से प्रेरित थे.
हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटा
हाई कोर्ट ने यह कहते हुए फैसले को पलट दिया कि केवल मौखिक रूप से प्यार का इजहार करना, अपने आप में यौन उत्पीड़न नहीं है. न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अनुचित स्पर्श, जबरन कपड़े उतारना या महिला की गरिमा को भंग करने के इरादे से अभद्र इशारे करना यौन अपराध का मामला हो सकता है. किसी भी पुष्ट सबूत के बिना केवल ” आई लव यू ” कहना कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करता है.
क्या है मामला?
मामला 2015 का है, जिसमें आरोपी ने कथित तौर पर 17 साल की नाबालिग लड़की को स्कूल से घर जाते समय रोका था. नाबालिग ने जो शिकायत की थी, उसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने उसका हाथ पकड़ा, उसका नाम पूछा और उससे कहा, ” मैं तुमसे प्यार करता हूं.”
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
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करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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