दिल्ली में इस हफ्ते तीसरे 'नो मनी फॉर टेरर' मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन, अमित शाह करेंगे समापन

तीसरे नो मनी फॉर टेटर सम्मेलन की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे के साथ-साथ इस खतरे के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति को दिए जा रहे महत्व और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे पर चर्चा को दर्शाती है.
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते ही नई दिल्ली में ‘नो मनी फॉर टेरर’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. सरकार के सूत्रों के हवाले से मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 18-19 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नो मनी फॉर टेरर मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. टेरर फंडिंग के खिलाफ दुनिया भर के देशों में समझ और सहयोग विकसित करने के लिए भारत के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह इस मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का समापन करेंगे और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई के साथ-साथ इसके खिलाफ सफलता हासिल करने के लिए भारत के दृढ़ संकल्प से अवगत कराएंगे.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तीसरे नो मनी फॉर टेटर सम्मेलन की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे के साथ-साथ इस खतरे के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति को दिए जा रहे महत्व और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे पर चर्चा को दर्शाती है. इस सम्मेलन का उद्देश्य पेरिस (2018) और मेलबर्न (2019) में पिछले दो सम्मेलनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा आयोजित आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने पर चर्चाओं को आगे बढ़ाना है. यह आतंकवाद के वित्तपोषण के सभी पहलुओं के तकनीकी, कानूनी, विनियामक और सहयोग पहलुओं पर चर्चा को शामिल करने का भी इरादा रखता है. यह आतंकवादी वित्तपोषण का मुकाबला करने पर केंद्रित अन्य उच्चस्तरीय आधिकारिक और राजनीतिक विचार-विमर्श के लिए भी गति निर्धारित करने का प्रयास करता है.
वैश्विक स्तर पर देखें, तो दुनिया के कई देश बरसों से आतंकवाद और उग्रवाद से प्रभावित हैं. अधिकांश देशों में हिंसा का पैटर्न अलग होता है, लेकिन बड़े पैमाने पर लंबे समय तक सशस्त्र सांप्रदायिक संघर्षों के साथ-साथ एक अशांत भू-राजनीतिक वातावरण से उत्पन्न होता है. इस तरह के संघर्ष अक्सर खराब शासन, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक अभाव और बड़े अनियंत्रित स्थानों की ओर ले जाते हैं. भारत ने तीन दशकों से अधिक समय में आतंकवाद के कई रूपों और इसके वित्तपोषण को देखा है, इसलिए यह समान रूप से प्रभावित राष्ट्रों के दर्द और आघात को समझता है.
शांतिप्रिय राष्ट्रों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने और टेरर फंडिंग का मुकाबला करने के लिए निरंतर आपसी सहयोग में मदद करने के लिए भारत ने अक्टूबर में दो वैश्विक कार्यक्रमों की मेजबानी की है. इसमें दिल्ली में इंटरपोल की वार्षिक आम सभा और संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधी समिति का एक विशेष सत्र शामिल है. भारत की राजधानी दिल्ली में आगामी 18-19 नवंबर को आयोजित होने वाला नो मनी फॉर टेरर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सहयोगी देशों के बीच समझ और सहयोग बनाने के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा.
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तीसरे ‘नो मनी फॉर टेरर’ सम्मेलन में चर्चा आतंकवाद और टेरर फंडिंग में वैश्विक रुझानों, टेरर फंडिंग के औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों के इस्तेमाल, उभरती प्रौद्योगिकियों और टेरर फंडिंग और संबंधित मुद्दे पर चर्चा के लिए आवश्यक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और चुनौतियों पर केंद्रित होगी. सम्मेलन दो दिनों में विस्तृत रूप से विचार-विमर्श के लिए 75 देशों और अंतरराष्ट्रीय निकायों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने का इरादा रखता है. सम्मेलन के तीसरे संस्करण का आयोजन यहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गृह मंत्रालय की देखरेख में किया जा रहा है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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