'देश में नहीं रुक रहा कोरोना संक्रमण, लॉकडाउन में सख्ती के लिए उतारी जाए सेना'
Author : ArbindKumar Mishra Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Apr 2020 8:29 PM
New Delhi: A COVID-19 patient arrives at LNJP hospital for treatment during the nationwide lockdown in the wake of coronavirus pandemic, in New Delhi, Saturday, April 18, 2020. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI18-04-2020_000039A)
उच्चतम न्यायालय (Supreme court) में एक याचिका दायर कर कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) के संक्रमण को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) को सही तरीके से लागू करवाने के वास्ते प्रशासन को सैन्य बलों की तैनाती का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि कुछ राज्यों में भीड़ ने लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर हमले किए हैं.
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को सही तरीके से लागू करवाने के वास्ते प्रशासन को सैन्य बलों की तैनाती का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि कुछ राज्यों में भीड़ ने लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस अधिकारियों पर हमले किए हैं.
याचिका में प्रशासन को नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक रणनीति और दिशा-निर्देश तय करने का भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों के जमावड़ा से संबंधित मामलों की जांच का भी निर्देश देना चाहिए.
याचिकाकर्ता के आर शेनॉय ने याचिका में कहा है, कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रण में करने के लिए लॉकडाउन को सही तरीके से लागू करना अत्यंत जरूरी है. हर राज्य में सैन्य बलों की तैनाती करना बहुत आवश्यक है. लिहाजा, देश के नागरिकों के फायदे के लिए जल्द से जल्द सैन्य बलों की तैनाती होनी चाहिए.
याचिका में दावा किया गया है कि विभिन्न राज्यों की तरफ से उठाए गए कदमों के बावजूद स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे लोगों और पुलिसकर्मियों पर हमले हो रहे हैं और कोरोना वायरस को रोकने की दिशा में यह बड़ी समस्या है.
याचिका में कहा गया, यह भी ध्यान दिलाया जाना जरूरी है कि पृथक वास में रह रहे लोग या उपचार करा रहे लोग पृथक वास, अस्पताल से भाग रहे हैं. इससे संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इन जगहों पर सुरक्षा की और व्यवस्था होनी चाहिए.
अपने-अपने गृह नगरों की ओर लौटने की आस में विभिन्न राज्यों में एक जगह जमा हुए लोगों के मुद्दे को भी उठाया गया है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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