रामलीला मैदान में पुरानी पेंशन योजना को लेकर जोरदार प्रदर्शन, देशभर से आये लोगों ने की फिर बहाल करने की मांग

Published by : Pritish Sahay Updated At : 01 Oct 2023 7:45 PM

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पुरानी पेंशन योजना को लेकर एक बार फिर रामलीला मैदान में देशभर से आये लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया. अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद यह पहला मौका है जब लोगों की भारी भीड़ ने जोरदार प्रदर्शन किया है.

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अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद पहली बार दिल्ली के रामलीला मैदान में लोगों का जमघट लगा है. विभिन्न राज्यों, केंद्र सरकार के विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS, एनएमओपीएस) के बैनर तले आज यानी रविवार को पेंशन शंखनाद महारैली  का आयोजन किया गया था.

प्रदर्शनकारियों ने लगाए नारे
रामलीला मैदान में देश के कई राज्यों से आये सरकारी कर्मचारियों ने कई तरह से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की. इस दौरान भीड़ ने यह भी नारे लगाये कि जो पुरानी पेंशन स्कीम फिर से लागू करेगा वही वही देश पर राज करेगा. इस दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल एक शख्स ने कहा कि देश में पुरानी पेंशन स्कीम 2004 से और महाराष्ट्र में 2005 से बंद है. हमें न्यू पेंशन स्कीम (NPS) नहीं चाहिए, हमें ये शेयर मार्केट स्कीम नहीं चाहिए. संविधान भी कहता है पुरानी पेंशन हमारा अधिकार है.

दिल्ली सरकार ने केंद्र किया ओपीएस लागू करने का आग्रह
इधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पुरानी पेंशन योजना (OPS, ओपीएस) को लेकर समर्थन जताया. साथ ही केंद्र से इसे दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू करने का अनुरोध किया. पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए 20 से अधिक राज्यों से केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से रामलीला मैदान में जोरदार प्रदर्शन के बीच केजरीवाल ने यह बात कही है. केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, हम ओपीएस को वापस लाने संबंधी सरकारी कर्मचारियों की मांग का पुरजोर समर्थन करते हैं. नई पेंशन योजना कर्मचारियों के खिलाफ अन्याय है. हमने पंजाब में ओपीएस लागू की है और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए इसे लागू करने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है. कुछ अन्य गैर-भारतीय जनता पार्टी सरकारों ने भी ओपीएस लागू की है.


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खाने से सजी थाली जैसी हो सेवानिवृत्ति बाद की आय- पीएफआरडीए चेयरमैन
पेंशन कोष विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के चेयरमैन दीपक मोहंती ने कहा है कि लोगों को पेंशन के लिये एक ‘स्वाभाविक पसंद’ विकसित करने की जरूरत है और सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन यापन के लिये ‘खाने से सजी थाली’ की तरह विभिन्न स्रोतों से आय होनी जरूरी है. मोहंती ने यह भी कहा कि जब भी कोई नौकरी या कामकाज शुरू करता है, तो उसे उसी समय से सेवानिवृत्ति आय और पेंशन के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए और इसके लिए निवेश भी करना चाहिए. लंबी अवधि तक निवेश करके ही ‘कम्पाउंडिंग’ (चक्रवृद्धि) का लाभ उठाकर सेवानिवृत्ति के लिये अच्छा कोष बनाया जा सकता है.

भाषा इनपुट से साभार  

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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