Panchayati Raj: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से देश की 2.5 लाख पंचायतों ने 3 लाख करोड़ रुपये का किया भुगतान

पंचायतों के डिजिटल तकनीक से जुड़ने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2019 से अब तक देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायत पंचायती राज मंत्रालय के डिजिटल प्लेटफार्म ई-ग्राम स्वराज के जरिये तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया है. ई ग्रामस्वराज के जरिये विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय में भुगतान किया गया और इससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी हुई है.
Panchayati Raj: देश में डिजिटल क्रांति तेजी से हो रही है. अब ग्राम पंचायत भी डिजिटल तकनीक से जुड़ चुकी है. इसके कारण पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता आयी है और पंचायत स्तर पर विकास में जनभागीदारी बढ़ रही है. पंचायतों के डिजिटल तकनीक से जुड़ने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2019 से अब तक देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायत पंचायती राज मंत्रालय के डिजिटल प्लेटफार्म ई-ग्राम स्वराज के जरिये तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया है.
ई ग्राम स्वराज के जरिये विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय में भुगतान किया गया और इससे भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी हुई है. ई-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत विकसित और पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से एकीकृत यह प्लेटफॉर्म पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन और व्यय का प्रबंधन करता है. इससे नकद-आधारित और कागजी प्रक्रियाओं से छुटकारा मिला है और पंचायत स्तर पर जवाबदेह और धोखाधड़ी रहित व्यवस्था बनाने में मदद मिली है.
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में, पंचायती राज संस्थाओं ने ई-ग्राम स्वराज और पीएफएमएस के जरिये 53,342 करोड़ हस्तांतरित किए, जबकि 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने प्लेटफॉर्म पर अपनी विकास योजनाएं अपलोड की. तकनीक से बनी पारदर्शी व्यवस्था के कारण बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है.
जमीनी स्तर पर तकनीक से आ रहा है बदलाव
पहले पंचायतों में सारा काम और खर्च नकदी और कागजों पर होता था. लेकिन ई-ग्राम स्वराज पोर्टल ने गांवों में विकास की योजना बनाने, हिसाब रखने और सरकारी पैसा खर्च करने के तरीके को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बना दिया है. इसके अलावा समावेशी ग्रामीण शासन को बढ़ावा देने में एआई-संचालित सभासार टूल का भी अहम योगदान है और अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है. पहले यह 13 स्थानीय भाषाओं में ही उपलब्ध था. अब ग्राम सभा की कार्यवाहीअसमिया, बोडो, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली और सिंधी में भी रिकॉर्ड हाेगी. स्थानीय भाषा की उपलब्धता से पंचायत स्तर पर आम लोगों को ग्राम पंचायत में व्यापक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित होगी.
सभासार स्वचालित रूप से बैठक के मिनट्स, उपस्थिति, संकल्प और कार्य बिंदुओं को रिकॉर्ड करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे ग्राम सभा प्रक्रियाएं अधिक सुलभ और भागीदारी पूर्ण बनती हैं. पहले हिंदी, बंगाली, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़, मराठी, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू में उपलब्ध यह प्लेटफॉर्म उपलब्ध था. गौरतलब है कि पंचायतों को विकास के लिए खुद के राजस्व के अलावा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत फंड आवंटित किया जाता है. 15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2021-26 के तहत 28 राज्यों में त्रिस्तरीय पंचायतों, पारंपरिक स्थानीय निकायों और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों के लिए 236805 करोड़ रुपये आवंटित किया है, जबकि 14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों के लिए 200292 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था.
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