‘ओमिक्रॉन’ के हल्के संक्रमण से भी शरीर के इन अंगों को पहुंचता है नुकसान, विशेषज्ञों ने बताया खतरनाक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jan 2022 9:16 PM
ओमिक्रॉन के हल्के संक्रमण भी शरीर के कई अंगों को डैमेज कर सकता है. नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है. विशेषज्ञों ने इसे बेहद खतरनाक बताया है.
Omicron damage: कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है. तेज रफ्तार से फैलते संक्रमण ने लोगों को डरा दिया है. हालांकि तेजी से फैलने के बावजूद इसके हल्के संक्रमण और लक्षणों को देखते हए लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं. लेकिन नए अध्ययन में कोरोना के स्वास्थ्य पर होने वाले साइड इफेफ्ट के बारे में पता चला है. जर्मनी के विशेषज्ञों ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है.
दरअसल यूरोपियन हार्ट जर्नल में छपे एक अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना का कैसा भी संक्रमण हो यह अपने संक्रमण के बाद अपना असर छोड़ जाता है. अब इस अध्ययन से चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि दुनिया में ओमिक्रॉन काफी तेजी से फैला है ऐसे में ज्यादातर आबादी के इसके चपेट में आने की संभावना है. जिससे बड़े स्तर पर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.
क्या कहा गया है अध्ययन में? अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कोरोना संक्रमण हल्का भी हो फिर भी शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. इस शोध में SARC-CoV-2 संक्रमण के हल्के लक्षण वाले 45 से 74 साल के 443 लोगों पर बड़े पैमाने पर जांच की गई. अध्ययन में बताया गया है कि इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जिनमें या तो हल्के लक्षण या कोई भी लक्षण नहीं थे. इस शोध का परिणाम बताता है कि इन संक्रमितों में संक्रमित नहीं हुए लोगों के मुकाबले मीडियम टर्म ऑर्गेन डैमेज देखा गया है. शोध विशेषज्ञों के मुताबिक लंग्स फंक्शन टेस्ट में फेफड़े का वॉल्यूम तीन फीसदी तक कम पाया गया और वायुमार्ग यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी कई परेशानियां सामने आई. इतना ही नहीं हार्ट में भी इसका प्रभाव देखा गया है.
Also Read: ‘ओमिक्रॉन’ का बढ़ता खतरा, कर्नाटक में एक दिन में 146 संक्रमित, केंद्र ने राज्यों को किया अलर्ट
हार्ट की पम्पिंग पावर में औसतन 1 से 2 फीसदी की कमी हुई है. हार्ट पर बढ़े तनाव के कारण खून में प्रोटीन का लेवल भी 41 फीसदी तक बढ़ गया है. शोध विशेषज्ञों को दो से तीन गुना ज्यादा बार लेग वीन थ्रोम्बिसिस यानी पैर के नसों में खून के थक्के जमने जैसे लक्षण भी मिलें.. किडनी की कार्यक्षमता में भी करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि दिमागी क्रिया पर इसका प्रभाव देखने को नहीं मिला है.
ओमिक्रॉन पर क्या है विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना के दूसरे वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से थोड़े कम नुकसान हो रहे हैं. डेल्टा सहित दूसरे वैरिएंट लोवर रेस्पिरेटरी सिस्टम में फैलते थे जिससे फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता था. लेकिन नया वैरिएंट ओमिक्रॉन अपर रिस्पिरेटरी सिस्टम में फैलता है जिससे फेफड़ों को कम नुकसान होने की संभावना है. इससे स्वाद, गंध की पहचान करने की क्षमता खोने जैसे लक्षण नहीं दिख रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार लक्षण नहीं दिखने से इसके फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










