OM BIRLA: संसदीय समितियां वाद-विवाद, चर्चा और जवाबदेही सुनिश्चित करने का मंच हैं, न कि विरोध और आरोप लगाने का

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 23 Jun 2025 7:51 PM

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प्राक्कलन समिति के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन की चर्चाओं में समितियों को अधिक सक्रिय, तकनीकी रूप से सशक्त और जन-केन्द्रित बनाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां तैयार होंगी.

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OM BIRLA: सार्वजनिक व्यय में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करने में वित्तीय अनुशासन जरूरी है. शासन को लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वित्तीय निगरानी तंत्र न केवल प्रभावी हो बल्कि समावेशी और लोगों के सरोकारों के प्रति उत्तरदायी भी हो. सार्वजनिक व्यय का मूल मंत्र दक्षता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन है. लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को  महाराष्ट्र विधान भवन, मुंबई में संसद और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के विधान मंडलों की प्राक्कलन समितियों के सभापतियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ये टिप्पणियां कीं. इस सम्मेलन का आयोजन भारत की संसद की प्राक्कलन समिति के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है.

एक महत्वपूर्ण निगरानी तंत्र के रूप में विकसित हुई है समिति

 इस अवसर पर बिरला ने कहा कि प्राक्कलन समिति के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह सम्मेलन न केवल इसकी उपलब्धियों का परिचायक है, बल्कि वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक दक्षता और प्रणालीगत सुधारों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में इसकी उभरती भूमिका का प्रतिबिंब भी हैं. दशकों से, समिति एक महत्वपूर्ण निगरानी तंत्र के रूप में विकसित हुई है जो बजटीय अनुमानों की जांच करती है, कार्यान्वयन का मूल्यांकन करती है और सरकार के कार्यों को बेहतर बनाने के लिए कार्रवाई योग्य सिफारिशें करती है. 

दूरदर्शी कार्य योजना बनाने पर होगी चर्चा

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय समितियों का उद्देश्य विरोध करना या आरोप लगाना नहीं है, बल्कि नीतियों और सरकारी कामकाज की जांच करना तथा आम सहमति एवं  विशेषज्ञतापूर्ण सिफारिशों के माध्यम से बेहतर शासन में योगदान देना है. उन्होंने संसदीय समितियों के कामकाज में डिजिटल टूल्स, डेटा एनालिटिक्स प्लेटफार्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग का समर्थन किया, ताकि गहन जांच की जा सके और साक्ष्य-आधारित सिफारिशें की जा सकें. उन्होंने आग्रह किया कि इस सम्मेलन में एक दूरदर्शी कार्य योजना तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए जिससे सरकार के सभी स्तरों पर प्राक्कलन समितियों की भूमिका मजबूत हो.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, देवेन्द्र फडणवीस,  महाराष्ट्र के उप-मुख्य मंत्री, एकनाथ शिंदे और अजित पवार,  महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति, राम शिंदे; महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष, राहुल नार्वेकर तथा भारतीय संसद की प्राक्कलन समिति के सभापति, संजय जायसवाल ने इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट जनसमूह को संबोधित किया. राज्य सभा के उप-सभापति, हरिवंश तथा महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता  अंबादास दानवे उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहें

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