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आर्यन खान केस के बाद एनसीबी के पर कतरने की तैयारी में मोदी सरकार, अब कम मात्रा में ड्रग्स रखना नहीं होगा अपराध

ड्रग्स मामले में बीते 10 नवंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में आयोजित एक हाई लेवल बैठक में इस प्रकार की सिफारिशों पर फैसला किया गया था. पीएमओ की इस बैठक में राजस्व विभाग, गृह विभाग, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सामाजिक न्याय मंत्रालय, और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
आर्यन खान और पिता शाहरूख खान.
आर्यन खान और पिता शाहरूख खान.
फोटो : ट्विटर.

नई दिल्ली : अक्टूबर महीने की शुरुआत में ही मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी और उसे लेकर देश भर में गरमाई राजनीति के बाद केंद्र की मोदी सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पर कतरने की तैयारी में जुट गई है. खबर है कि आगामी 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक ऐसा कानून बनाने जा रही है, जिसमें यह नियम बनाया जाएगा कि कम मात्रा में ड्रग्स रखना अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही नारकोटिक्स कानून में संशोधन करने के समेत 26 विधेयकों को पेश करने का फैसला किया है. नारकोटिक्स कानून में संशोधन को लेकर संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक में इस बात को लेकर भी प्रस्ताव किया गया है कि कम मात्रा में गांजा, भांग समेत मादक पदार्थ रखना अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों की राय है कि सरकार के इस कदम से नशे की चपेट में आए लोगों को सुधरने का मौका मिल सकेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में मुंबई क्रूज ड्रग्स केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद यह मांग उठी थी. इसके साथ ही, ड्रग्स मामले में बीते 10 नवंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में आयोजित एक हाई लेवल बैठक में इस प्रकार की सिफारिशों पर फैसला किया गया था. पीएमओ की इस बैठक में राजस्व विभाग, गृह विभाग, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सामाजिक न्याय मंत्रालय, और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे.

दरअसल, सरकार की ओर से प्रस्तावित में नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) बिल-2021 के तहत मादक पदार्थों के निजी इस्तेमाल को अपराध के दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है. इसके लिए वर्ष 1985 में संसद से पारित कानून की धाराओं 15,17,18, 20, 21 और 22 में संशोधन किए जाएंगे, जिनका संबंध ड्रग्स की ख़रीद, इस्तेमाल और फंडिंग से है.

बता दें कि आर्यन खान मामले में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले समेत देश की कई नामी-गिरामी हस्तियों ने कानून में बदलाव करने की मांग की थी. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने अपने एक बयान में कहा था, 'लोगों को सुधरने का मौका मिलना ही चाहिए.'

सरकार के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले एनडीपीएस बिल-2021 में किसी व्यक्ति के ड्रग्स रखने, निजी तौर पर इस्तेमाल करने और बेचने में अंतर किया जाएगा. इसमें मादक पदार्थों को बेचने के मामले को तो अपराध माना जाएगा, लेकिन बेहद कम मात्रा में रखने और निजी इस्तेमाल को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाएगा.

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