भारत में मिला नया सुपरबग, खतरनाक साबित हो सकता है वायरस वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

वैज्ञानिकों ने पानी औऱ मिट्टी से 48 सैंपल इकट्ठा किये थे. इस सैंपल की जांच के बाद ही इस वायरस का पता चला है. इस वायरस को खतनाक माना जा रहा है और वैज्ञानिकों ने अगली संभावित महामारी तक करार दे दिया है.
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वायरस की जांच के लिए लिये गये थे 48 सैंपल
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आसानी से नहीं चलता संक्रमितों का पता
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दवाओं का असर भी होता है कम
पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस ने चिंता में डाल दिया है वहीं एक और वायरस चिंताएं बढ़ा सकता है. वैज्ञानिकों को अंडमान द्विप समूह के पास एक नया वायरस मिला है जिसे कैंडिडा ऑरिस’ के नाम से जाना जाता है इसे खतरनाक सुपरबग बताया जा रहा है. इस खतरनाक वायरस की वजह से देश में परेशानी बढ़ सकती है .
वैज्ञानिकों ने पानी और मिट्टी से 48 सैंपल इकट्ठा किये थे. इस सैंपल की जांच के बाद ही इस वायरस का पता चला है. इस वायरस को खतनाक माना जा रहा है और वैज्ञानिकों ने अगली संभावित महामारी तक करार दे दिया है.
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इसकी जांच के दौरान वैज्ञानिकों ने माना है कि यह वायरस मल्टीड्रग-रेसिसटेंट हो सकता है इसका सीधा अर्थ है कि इस पर कई दवाओं का असर नहीं होगा. यह बग सूक्ष्मजीव गंभीर रक्तप्रवार संक्रमण का कारण बन सकता है. इससे संक्रमित रोगियों जिन्हें कैथेटर, फीडिंग ट्यूब या श्वास नलियों की आवश्यकता होती है यह उनके लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है
वैज्ञानिकों ने बताया कि इससे संक्रमित व्यक्ति का पता आसानी से नहीं चलता इससे ठंड और सामान्य तौर पर कोई भी लक्षण नहीं दिखते इस पर दवाओं का असर नहीं होता इसलिए इसे ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है. इससे संक्रमित रोगी की मृत्यृ भी हो सकती है. यह किसी घाव या चोट के माध्यम से प्रवेश करता है.
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इससे पहले यह लंबे समय तक फंगस में जिंदा रहता है. गंभीर मामलों में सेप्सिस की भी समस्या हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में सेप्सिस के कारण हर साल 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है. साल 2009 में जापान में इस संबंधित मामला सामने आया था. ब्रिटेन और अमेरिका में भी इसके प्रभावों को दर्ज किया गया है. यह खून के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है
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