New Parliament House: जानें कौन हैं बिमल पटेल जिन्होंने नये संसद भवन को बनाया इतना सुंदर, देखें तस्वीर
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 Sep 2023 2:16 PM
**EDS: SCREENSHOT VIA SANSAD TV** New Delhi: Parliamentarians in the Lok Sabha during a special session at the Parliament House, in New Delhi, Tuesday, Sept. 19, 2023. (PTI Photo) (PTI09_19_2023_000085B)
New Parliament House: आज का दिन लोकतंत्र के मंदिर के लिए खास है. जी हां...राज्यसभा और लोकसभा मंगलवार को यानी गणेश चतुर्थी के दिन नये संसद भवन में स्थानांतरित हो चुका है. जानें इस भवन के बारे में खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, कई सांसद मंगलवार को पुरानी इमारत से पैदल चलकर नए संसद भवन पहुंचे. इसके कुछ देर बाद संसद के नये भवन में लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई. आपको बता दें कि भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन 27 मई को किया गया था और नए संसद भवन का डिज़ाइन बिमल पटेल ने किया था.

बिमल पटेल के नाम से यदि आप वाकिफ नहीं हैं तो आपको बता दें कि वे एक आर्किटेक हैं जिन्होंने नये संसद भवन का डिजाइन बनाया है. गुजरात के रहने वाले बिमल पटेल का नाम काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अपनी तरह की पहली साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना से भी जुड़ा हुआ है.

बिमल हसमुख पटेल को आर्किटेक का अनुभव तीन दशक से ज्यादा का है. पटेल अहमदाबाद में सीईपीटी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष हैं. वह एचसीपी डिज़ाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख भी हैं. एचसीपी डिज़ाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना उनके पिता हसमुख सी पटेल ने 1960 में की थी.

बिमल पटेल ने अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से पढ़ाई की. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी, सीईपीटी गए. 1995 में पीएचडी करने के लिए वे अमेरिका के यूसी बर्कले पहुंचे. बिमल पटेल को 2019 में पद्मश्री समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

रिपोर्ट्स की मानें तो, बिमल पटेल की कंपनी को नई संसद सहित महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए परामर्श सेवाओं के लिए 229.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है.

नये संसद भवन की दीवारों और गलियारों में प्रदर्शित कलाकृतियां वैदिक काल से लेकर आज तक भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की कहानियां बयां करती नजर आ रहीं हैं. नया संसद भवन पूरी तरह से डिजिटल है. लोकसभा और राज्यसभा के कमरे अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम से लैस हैं.

नये संसद भवन की बात करें तो इसमें तीन द्वार हैं… ज्ञान, शक्ति और कर्म द्वार….सांसदों और वीवीआइपी के लिए अलग-अलग द्वार तैयार किये गये हैं. सार्वजनिक प्रवेश द्वार तीन दीर्घाओं की ओर जाते हैं. संगीत गैलरी, स्थापत्य गैलरी और शिल्प गैलरी… ये तीनों भारत के विविधताओं को दर्शाने का काम करेंगे.

नये संसद भवन की खास बात ये हैं कि यहां लोकसभा के कक्ष को राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्यसभा के कक्ष को राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ से दर्शाया गया है. लोकसभा और राज्यसभा कक्षों में ‘फाल्स सीलिंग’ के लिए स्टील की संरचना केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव से मंगायी गयी है.

नये संसद भवन में तीन औपचारिक अग्रदीर्घाएं हैं, जहां महात्मा गांधी, चाणक्य, गार्गी, सरदार वल्लभभाई पटेल, बीआर आंबेडकर और कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ के पहिये की पीतल की विशाल मूर्तियां प्रदर्शित की गयी हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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