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राफेल मामले में नया दावा : डील कराने के लिए फ्रांसीसी कंपनी ने बिचौलिए को दिए थे 65 करोड़ की रिश्वत

Updated at : 08 Nov 2021 9:57 AM (IST)
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राफेल मामले में नया दावा : डील कराने के लिए फ्रांसीसी कंपनी ने बिचौलिए को दिए थे 65 करोड़ की रिश्वत

ऑनलाइन मैग्जीन मीडियापार्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दस्तावेजों के होने के बाद भी भारत की जांच एजेंसियों ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया.

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नई दिल्ली : लड़ाकू विमान राफेल मामले में एक नया दावा किया गया है. इस नए दावे में यह आरोप लगाया गया है कि लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को पक्का कराने के लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने भारतीय बिचौलिए सुशेन गुप्ता को तकरीबन 65 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी. ऑनलाइन मैग्जीन मीडियापार्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिचौलिए को फ्रांसीसी कंपनी की ओर से दी गई रिश्वत की जानकारी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी थी.

ऑनलाइन मैग्जीन मीडियापार्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दस्तावेजों के होने के बाद भी भारत की जांच एजेंसियों ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें ऑफशोर कंपनियां, संदिग्ध अनुबंध और फेक चालान शामिल हैं. इसके साथ ही, मीडियापार्ट की ओर से यह खुलासा भी किया जा सकता है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सहयोगियों के पास अक्टूबर 2018 से सबूत हैं कि फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट ने बिचौलिए सुशेन गुप्ता को कम से कम 65 करोड़ यानी 7.5 मिलियन यूरो का सीक्रेट कमीशन भुगतान किया है.

मीडियापार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कथित फेक चालानों ने फ्रांसीसी विमान निर्माता दसॉल्ट एविएशन को भारत के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा सेक्योर करने में मदद करने के लिए गुप्ता को सीक्रेट कमीशन कम से कम 7.5 मिलियन यूरो यानी करीब 65 करोड़ रुपये का भुगतान करने में सक्षम बनाया. हालांकि, इन दस्तावेजों के मौजूद होने के बावजूद भारतीय एजेंसियों ने मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाई और उसके आधार पर जांच की शुरुआत ही नहीं की.

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क्या होगी खासियत

भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब पांच महीने पहले ही ऑनलाइन मैग्जीन मीडियापार्ट ने बताया था कि राफेल सौदे में संदिग्ध ‘भ्रष्टाचार और पक्षपात’ की जांच के लिए एक फ्रांसीसी जज को नियुक्त किया गया था. अप्रैल 2021 की एक रिपोर्ट में ऑनलाइन पत्रिका ने दावा किया था कि उसके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिसमें दिखाया गया है कि दसॉल्ट और उसके औद्योगिक साझेदार थेल्स (एक रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म) ने बिचौलिए सुशेन गुप्ता को राफेल सौदे के संबंध में ‘सीक्रेट कमीशन’ में कई मिलियन यूरो का भुगतान किया था.

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