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छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित रेंगानार कोरोना वैक्सीन लगाने में अव्वल, पहली खुराक लेने वाला राज्य का पहला गांव बना

Updated at : 16 Jun 2021 5:03 PM (IST)
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छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित रेंगानार कोरोना वैक्सीन लगाने में अव्वल, पहली खुराक लेने वाला राज्य का पहला गांव बना

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले का रेंगानार गांव राज्य का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां के सभी लोगों ने कोरोना रोधी टीके की पहली खुराक लगवा लिया है.

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रायपुर : कोरोना का टीका लगवाने के लिए एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीण इलाकों के लोगों का मान-मनौव्वल करना पड़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल गांव रेंगानार ने इस मामले में कीर्तिमान स्थापित किया है. यहां के करीब-करीब सभी लोगों ने कोरोना के टीके की पहली खुराक लगवा ली है. इसी के साथ, नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल रेंगानार गांव में राज्य में कोरोना का टीका लगवाने वाला पहला गांव बन गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले का रेंगानार गांव राज्य का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां के सभी लोगों ने कोरोना रोधी टीके की पहली खुराक लगवा लिया है. राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से लगभग 20 किलोमीटर दूर नकुलनार रोड पर स्थित आदिवासी बहुल रेंगानार गांव में 18 से 44 साल के करीब 310 लोग रहते हैं. टीकाकरण के लिए पात्र वहां के सभी 294 लोगों ने कोरोना से बचाव में टीके के महत्व को समझते हुए इसकी खुराक लगवा लिया है.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आदिवासी बहुल रेंगानार गांव में 45 साल से अधिक उम्र के ग्रामीण और 18 से 44 साल के युवाओं को टीके के प्रति जागरूक करने में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों और जागरूकता दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अपनी लगातार कोशिशों से वे ग्रामीणों को समझाने में कामयाब रहे कि कोरोना से बचने के लिए अभी टीका ही सबसे प्रभावी उपाय है.

अधिकारियों ने बताया कि रेंगानार ने राज्य के सामने मिसाल कायम की है. टीकाकरण के माध्यम से कोरोना को मात देने में गांव का हर जवान व्यक्ति अपनी अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों के विपरीत यहां के लोगों के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट की काफी सीमित सुविधा उपलब्ध है, जिसके चलते सौ फीसदी टीकाकरण आसान नहीं था. हालांकि, टीकाकरण के प्रति ग्रामीणों के उत्साह और स्वास्थ्यकर्मियों और जागरूकता दल की लगातार कोशिशों से रेंगानार गांव ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा टीकाकरण की शुरुआत में गांववालों के लिए कुआंकोंडा इलाके में कई सत्र आयोजित किए गए, लेकिन भ्रांतियों और जागरूकता की कमी के कारण कम लोग ही टीका लगवा रहे थे. तब रेंगानार गांव की सरपंच सनमति तेलामी और स्थानीय कोरोना जागरूकता दल ने लोगों को जागरूक कर टीकाकरण के लिए तैयार किया.

रेंगानार पंचायत के जागरूकता टीम के सदस्य संतराम बताते हैं कि शुरू में टीके को लेकर लोगों में हिचकिचाहट थी. समझाने के बाद उनका डर दूर हुआ और लोगों ने टीका लगाने के लिए हामी भरी. स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें रंग लाईं और पहले ही दिन रेंगानार गांव के 18 साल से अधिक के 125 युवाओं ने उत्साहपूर्वक टीका लगवाया. गांव में युवकों की आबादी 310 में से टीकाकरण के लिए पात्र सभी 294 व्यक्तियों को कोरोना से बचाव का पहला टीका लग चुका है. संतराम ने बताया कि इस अभियान में दिव्यांगजनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. उन्होंने खुद टीका लगवाया और अन्य लोगों को भी प्रेरित किया.

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Posted by : Vishwat Sen

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