नेवल लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ने पहली बार आईएनएस विक्रांत से भरी उड़ान, देखें इसकी खासियत
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 06 Feb 2023 8:00 PM
आईएनएस विक्रांत पर एलसीए (नौसेना) की लैंडिंग को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है. यह स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक को डिजाइन, विकसित, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है.
भारत के स्वदेश विकसित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए-नेवी) को सोमवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर उतारा गया, जिसे नौसेना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है. नौसेना ने कहा कि उसके पायलट ने विमान को पोत पर उतारा.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में साबित हुआ मील का पत्थर
आईएनएस विक्रांत पर एलसीए (नौसेना) की लैंडिंग को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है. यह स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक को डिजाइन, विकसित, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है. नौसेना ने बयान में कहा, नौसेना के पायलटों द्वारा एलसीए (नेवी) को आईएनएस विक्रांत पर उतारे जाने के साथ भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. नौसेनाध्यक्ष के एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा, भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर पर स्वदेशी LCA नेवी की सफल लैंडिंग और टेक-ऑफ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे सामूहिक विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
सितंबर में पीएम मोदी ने आईएनएस विक्रांत को नौसेना में किया था शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल भारत के प्रथम स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना की सेवा में शामिल किया था.
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HISTORIC: Visuals of LCA Navy and MiG29K jets making first landings/takeoff on INS Vikrant pic.twitter.com/REAEE7akTK
— ANI (@ANI) February 6, 2023
क्या है आईएनएस विक्रांत की खासियत
आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा है. इसकी ऊंचाई 61 मीटर है और इसका फ्लाइट डेक 12,500 वर्ग मीटर है. जिसकी अधिकतम गति 28 समुद्री मील है. विक्रांत भारतीय नौसेना द्वारा संचालित होने वाला चौथा विमानवाहक पोत है. 1961 से 1997 तक पहला विक्रांत (ब्रिटिश मूल), 1987 से 2016 तक आईएनएस विराट (ब्रिटिश मूल) और 2013 से आईएनएस विक्रमादित्य.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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