भव्यता में राम मंदिर से कम नहीं है अबू धाबी का हिंदू मंदिर, पीएम मोदी करने वाले हैं उद्घाटन, जानें खास बातें

Published by : Pritish Sahay Updated At : 13 Feb 2024 11:46 AM

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अबू धाबी में बने बीएपीएस हिंदू मंदिर का कल यानी 14 फरवरी को पीएम मोदी उद्घाटन करने वाले हैं. विदेशी जमीन में यह अबतक का बना सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है. इसका निर्माण 27 एकड़ जमीन पर किया गया है. यह 108 फीट ऊंचा है. इसमें 12 गुंबद पिरामिड की आकृति में बने हैं, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगा रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर यूएई रवाना हो रहे हैं. अन्य कार्यक्रमों के साथ-साथ अबू धाबी में पीएम मोदी नवनिर्मित भव्य हिन्दू मंदिर का उद्घाटन करेंगे. यह विदेश में बना अबतक का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है.  पीएम मोदी के स्वागत के लिए यूएई में भव्य तैयारी की गई है.अपने यूएई दौरे में पीएम मोदी कल यानी 14 फरवरी को बीएपीएस हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे. वहीं, आज यानी मंगलवार को पीएम मोदी अबु धाबी के जायद स्पोर्ट्स सिटी स्टेडियम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी के कार्यक्रम का नाम अहलान मोदी यानी नमस्कार मोदी रखा गया है.  वहीं, खराब मौसम के कारण प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम के समय में थोड़ा बदलाव किया गया है.

पीएम मोदी ने किया ट्वीट

थोड़ी देर में पीएम मोदी यूएई रवाना होने वाले हैं. यूएई में पीएम मोदी के स्वागत की भव्य तैयारी की गई है. हालांकि खराब मौसम के कारण कार्यक्रम में व्यवधान आ सकता है. दरअसल संयुक्त अरब अमीरात में बीती रात जोरदार बारिश हुई. बारिश से यातायात जाम के साथ जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई जिसके कारण ‘अलहान मोदी’ कार्यक्रम को छोटा करने का फैसला किया गया. वहीं, अबु धाबी में आज हिंदू प्रवासियों को संबोधित करने से पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पीएम मोदी ने लिखा कि हमें अपने प्रवासी भारतीयों और दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव को गहरा करने के उनके प्रयासों पर बहुत गर्व है. आज शाम मैं अहलान मोदी कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात के भारतीय प्रवासियों के बीच शामिल होने के लिए उत्सुक हूं! इस यादगार अवसर में अवश्य शामिल हों.


27 एकड़ में फैला है अबु धाबी का मंदिर

साल 2017 में अबू धाबी के युवराज शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मंदिर निर्माण के लिए 27 एकड़ जमीन उपहार में दी. 11 फरवरी 2018 को पीएम मोदी ने इसका शिला-पूजन किया था. 2019 में इस मंदिर ने मैकेनिकल प्रोजेक्ट्स ऑफ द ईयर का खिताब भी जीता था. इसके बाद से इस मंदिर की भव्यता की लोग कायल हो गये और इसके पूरा होने का इंतजार करने लगे. अब यह मंदिर बन कर तैयार है और इसका उद्घाटन कल यानी बुधवार को पीएम मोदी कर रहे हैं. 27 एकड़ जमीन में फैले इस मंदिर में बेहद नाजुक, भव्य और शानदार नक्काशी की गयी है. मंदिर का निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से हुआ है. जिसे राजस्थान से मंगाया गया है.  इसके निर्माण में 700 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया गया है. मंदिर का निर्माण बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के नेतृत्व में हुआ है.

राम मंदिर से कम नहीं है बीएपीएस हिंदू मंदिर की वास्तुकला

बीएपीएस हिंदू मंदिर का निर्माण 27 एकड़ जमीन पर किया गया है. यह 108 फीट ऊंचा है. इसमें 12 गुंबद पिरामिड की आकृति में बने हैं. मंदिर में 7 शिखर और 410 स्तंभ हैं. 1000 साल तक मंदिर जस-का-तस रहेगा. मंदिर में 40,000 घन मीटर संगमरमर लगे हैं. जबकि, 180 हजार घन मीटर बलुआ पत्थर इस्तेमाल किए गए हैं. इसमे 18 लाख ईंट लगे हैं. सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में 100 सेंसर लगे हैं. मंदिर की नींव में भूकंपीय गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए यंत्र लगे हैं. वहीं मौसम पर नजर रखने के लिए 350 से अधिक सेंसर लगाये गये हैं.

अयोध्या राम मंदिर जैसी दिखेगी झलक

बीएपीएस हिंदू मंदिर की डिजाइन वैदिक वास्तुकला से प्रेरित है. इसके तल में अभिषेक मंडपम है. राम मंदिर की तरह ही लोहे और स्टील का नहीं किया गया है इस मंदिर में उपयोग. इंटरलॉकिंग पद्धति से संगमरमर के विशाल शिलाओं की फिटिंग की गई है. शिव पुराण, भागवत पुराण की कहानियों पर इसकी नक्काशी की गई है. स्वामीनारायण, वेंकटेश्वर और अय्यप्पा के जीवन का चित्रण प्रस्तुत किया गया है. स्वामी नारायण हिंदू मंदिर के भव्य गुंबदों को सद्भाव का गुंबद कहा जा रहा है. यह गुंबद पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व अंतरिक्ष को प्रदर्शित करता है. यहां एक झरना है, जो गंगा, यमुना और सरस्वती के स्रोत का है प्रतीक है.

इन देवी-देवता के चित्रों से सुसज्जित

बीएपीएस हिंदू मंदिर में स्वामीनारायण, अक्षर-पुरुषोत्तम, राम-सीता, लक्ष्मण, हनुमान, शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, राधा-कृष्ण, पद्मावती-वेंकटेश्वर, जगन्नाथ और अय्यप्पा की प्रतिमा रखी गई है. मंदिर की दीवारों पर रामायण की अलग-अलग कहानियों की नक्काशी की गयी है. जिसमें भगवान राम का जन्म, सीता स्वयंवर, राम वन गमन, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और भरत-मिलाप जैसे प्रसंगों के दृश्यों को बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा गया है. मंदिर में हाथी के सुंदर दृश्य भी उकेरे गये हैं, जो भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं. एक तरफ ऊंट हैं, जो कि अरबी संस्कृति को दर्शा रहा है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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