Nagpur Violence: अफवाह या साजिश, कैसे सुलगा नागपुर? सोशल मीडिया पर पुलिस की कड़ी नजर

Nagpur Violence
Nagpur Violence: महाराष्ट्र में औरंगजेब विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया है. नागपुर में भारी हिंसा के बाद मंगलवार को पुलिस ने पूरे इलाके में फ्लैग मार्च किया. पुलिस हिंसा के पीछे साजिश को लेकर भी जांच करेगी. बीजेपी ने हिंसा के पीछे साजिश की आशंका व्यक्त की है. इधर नागपुर हिंसा के लिए विपक्ष ने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है.
Nagpur Violence: महाराष्ट्र के नागपुर शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. नागपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ रविंदर सिंघल ने कहा, “हमने मामला दर्ज कर लिया है और लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं. शांति स्थापित करने के लिए हमारी कार्रवाई जारी है. सोशल मीडिया पर नज़र रखी जा रही है और जो जानकारी मिल रही है, उसे हम आगे बढ़ा रहे हैं. क्या किसी ने इसकी साजिश रची थी और इसमें कितने लोग शामिल थे, इसकी जांच की जा रही है.” पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए मंगलवार को हिंसा प्रभावित इलाके में फ्लैग मार्च किया.
अफवाह के बाद फैली हिंसा
सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान एक समुदाय का धर्मग्रंथ जलाया गया है. इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए.
घटना में घायल डीसीपी निकेतन कदम ने बताई हिंसा की भयावह कहानी
नागपुर हिंसा में घायल हुए डीसीपी निकेतन कदम ने बताया, “काफी भीड़ जमा हो गई थी. उसके बाद पथराव हुआ और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. हमारे पास बहुत सी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं, जिसमें कुछ असामाजिक तत्व हथियारों के साथ घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं. जिस तरह से हर तरफ से पथराव हो रहा था, हमारे कुछ अधिकारी भी घायल हुए हैं. 100 लोगों की भीड़ अचानक दूसरी गली से आई, उनके पास हथियार थे, उनके पास पेट्रोल था, उनके पास लाठियां थीं, तो मेरी टीम वहां थी, तो मेरी स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी कि उन्हें वहीं रोक दूं या पीछे धकेल दूं, वरना कुछ भी हो सकता था. तो मैं आगे बढ़ा और उन्हें रोकने की कोशिश की, उनमें से कुछ पीछे हट गए लेकिन उनमें से एक के पास कुल्हाड़ी थी, उसने आगे आकर मुझ पर हमला कर दिया और मेरे हाथ पर गहरी चोट लग गई. लेकिन शुक्र है कि हमारी टीम के किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई. जल्द ही, उनकी (आरोपियों की) पहचान कर ली जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सीएम (देवेंद्र फडणवीस) ने मुझे फोन करके मेरा हालचाल पूछा और इसके साथ ही उन्होंने पूरी नागपुर पुलिस की तारीफ भी की. इससे निश्चित रूप से नागपुर पुलिस का आत्मविश्वास बढ़ेगा और हम भविष्य में भी इसी तरह हिम्मत से काम करते रहेंगे.”
बीजेपी ने हिंसा के पीछे बताया साजिश
बीजेपी ने हिंसा के पीछे साजिश की आशंका व्यक्त की है. नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि माहौल को खराब करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया. बावनकुले ने सभी समुदायों के सदस्यों से सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की और उन्होंने पुलिस आयुक्त तथा जिलाधिकारी के साथ समीक्षा बैठक की.
एकनाथ शिंदे ने हिंसा को बताया पूर्व नियोजित
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि नागपुर में हुई हिंसा सांप्रदायिक अशांति फैलाने के उद्देश्य से की गई एक पूर्व नियोजित घटना थी. शिंदे ने कहा, “करीब 2,000 से 3,000 लोग एकत्र हुए और मोमिनपुरा, चिटनिस नगर और अन्य इलाकों में घरों पर हमला किया. उन्होंने पत्थरबाजी की और हमला किया.”
चादर जलाने वाले आरोप को विहिप ने किया खारिज
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मंगलवार को कहा कि वह मुगल बादशाह औरंगजेब के महिमामंडन के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगी. विहिप के विदर्भ प्रांत के मंत्री देवेश मिश्रा ने कहा कि प्रशासन को सोमवार को नागपुर में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. मिश्रा ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि नागपुर में विहिप और बजरंग दल के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान धार्मिक पंक्तियां लिखी हुई चादर जलाई गई, जिससे हिंसा भड़की.
अंबादास दानवे ने नागपुर हिंसा के लिए मुख्यमंत्री और उनकी सरकार को ठहराया जिम्मेदार
महाराष्ट्र विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने नागपुर में हुई हिंसा के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ बीजेपी राज्य में सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश कर रही है.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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