Murshidabad Violence : जाफराबाद में डर के साए में लोग, लूटे गए थे मॉल

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 14 Apr 2025 7:18 AM

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Murshidabad Violence Updates

Murshidabad Violence : मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा चिंताजनक है. जिन इलाकों में हिंसा भड़की, वहां का मंजर दिल दहला देने वाला बताया जा रहा है. दहशत में जीते लोगों ने अपनी पीड़ा बताई. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है, जो पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं. स्थानीय लोग जो कुछ भी बता रहे हैं, वह काफी भावुक कर देने वाला है.

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Murshidabad Violence : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया. धूलिया, शमशेरगंज और सुती जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा के बाद हालात बहुत खराब हो गए. सड़कों पर जली गाड़ियां, लूटे गए मॉल और टूटी फार्मेसियां तबाही का मंजर दिखा रहे हैं. रविवार को इलाके में सन्नाटा पसरा रहा, दुकानें बंद रहीं और लोग घर के अंदर ही रहे.हालात पर नियंत्रण के लिए पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बल लगातार गश्त कर रहे हैं.

उपद्रवियों ने पिता-पुत्र की हत्या की

शमशेरगंज के जाफराबाद में शनिवार को उपद्रवियों ने पिता-पुत्र की हत्या कर दी थी. उस घर में जब सुरक्षा बलों और मीडिया कर्मियों ने प्रवेश किया तो परिवार के लोग डरे हुए थे. पड़ोसी मौन साधे खड़े रहे. पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया, ‘‘उन्हें (पिता-पुत्र को)घर से घसीट कर बाहर निकाला गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई. हमलावरों ने उत्पात मचाया और फर्नीचर तोड़ दिया. खाना पकाने के बर्तन घर के बाहर फेंक दिए. हम अब भी बाहर जाने से बहुत डरते हैं.’’ धुलियान के 80 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘वे आए और हमारे घरों पर हमला किया. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन वक्फ (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के खिलाफ था. मेरा वक्फ से कोई लेना-देना नहीं है.’’

अब तक 150 लोग गिरफ्तार

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार ने कहा कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है. सामान्य स्थिति बहाल होने तक सुरक्षा बल सतर्क हैं. उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल जिले में कहीं से भी हिंसा की कोई नई घटना की सूचना नहीं मिली है. एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘जिले के सुती, धुलियान, शमशेरगंज और जंगीपुर इलाकों में स्थिति शांतिपूर्ण है. रातभर छापेमारी जारी रही. 12 और लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके साथ ही अब तक 150 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.’’ उन्होंने बताया कि हिंसा प्रभावित इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

Murshidabad: security personnel keep a vigil at an area amid protests over the waqf (amendment) act, in murshidabad district

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मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ शुक्रवार को हुए विरोध के दौरान कई इलाकों में भड़की हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस वैन समेत कई वाहनों में आग लगा दी, सुरक्षा बलों पर पथराव किया और सड़कें जाम कर दी। शनिवार को भी कुछ जगहों से हिंसा की खबर आईं. पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को सुती के सजुर मोड़ पर हुई झड़पों के दौरान गोली लगने के बाद घायल हुए 21 वर्षीय एजाज मोमिन की शनिवार को मौत हो गई. शुक्रवार को हुई हिंसा में कम से कम 18 पुलिसकर्मी घायल हो गए. शनिवार रात शमशेरगंज पहुंचे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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