MP Election 2023: जन आशीर्वाद यात्रा, मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को रिझाने में जुटी शिवराज सरकार
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 11 Sep 2023 7:18 PM
धार जिले की कुक्षी विधानसभा के पूर्व विधायक मुकाम सिंह किराड़े का दावा है कि चुनाव सामने आते ही कांग्रेस एक बार फिर आदिवासी हितों की बात कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने सदैव आदिवासी हितों की उपेक्षा की है.
मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से चलाई जा रही जन आशीर्वाद यात्रा में केंद्रीय नेताओं के आने से जनता और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है. हालांकि, इस यात्रा के जरिए आदिवासियों को साधने की पूरी कोशिश की जा रही है और आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि, मध्य प्रदेश में आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, जिसका लाभ जनता को मिल रहा है. हालांकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का रत्यक्ष प्रभाव भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा में नजर भी आ रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा की जन आशीर्वाद में ‘डबल इंजन सरकार मतलब राज्य में विकास की दोगुनी रफ्तार’ जैसे संदेश दिए जा रहे हैं.
डबल इंजन सरकार के फायदे गिना रही भाजपा
मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व डबल इंजन सरकार के काम और उसके फायदों से आदिवासी जनता को रू-ब-रू करा रहा है. इससे शीर्ष नेतृत्व को यात्रा के दौरान फायदा भी मिल रहा है. आदिवासी इलाकों में लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. जब केंद्रीय नेता प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यों की प्रशंसा करते हैं, तो आदिवासी लोग भी अपनी सहमति प्रदान करते हैं.
शीर्ष नेतृत्व को जनता का समर्थन
दावा यह भी किया जा रहा है कि आदिवासी इलाकों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. मध्य प्रदेश में पेसा एक्ट लागू है. इसके अलावा भी प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनजातीय कल्याण की कई योजनाओं ने इन आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर बदली है. इन्हीं योजनाओं का असर आदिवासी इलाकों में पहुंच रही जन आशीर्वाद यात्राओं पर सीधा नजर आ रहा है.
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आदिवासी राग फिर अलाप रही कांग्रेस
धार जिले की कुक्षी विधानसभा के पूर्व विधायक मुकाम सिंह किराड़े का दावा है कि चुनाव सामने आते ही कांग्रेस एक बार फिर आदिवासी हितों की बात कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने सदैव आदिवासी हितों की उपेक्षा की है. एक बार तो जोड़-तोड़ कोशिश से आदिवासी मुख्यमंत्री को अपदस्थ किया और अपनी सरकार बनाई, जबकि दो बार मुख्यमंत्री पद के लिए आदिवासी समाज के नेता की नैसर्गिक दावेदारी छीनी. स्वाधीनता संघर्ष में जिन आदिवासियों ने बलिदान दिया, उन्हें भी कांग्रेस ने कभी उचित सम्मान नहीं दिया.
गरीबों का जीवन सुधारने में केंद्र का साथ दे रही शिवराज सरकार
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर प्रदेश के आदिवासी समुदाय को अब यह पता चल गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीबों के जीवन स्तर को उठाने के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश सरकार भी समान रूप से सहभागिता कर रही है. इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में मध्यप्रदेश अव्वल रहा है. अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना में लाडली बहनों को भी शामिल करने की घोषणा की है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में जिन गरीब बहनों के नाम छूट गए हैं, उनसे आवेदन लेकर लाडली बहना आवास योजना में उन्हें पक्के मकान दिए जाएंगे.
आदिवासी महिलाओं की भागीदारी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों को लेकर कई योजनाओं की शुरुआत की. लाडली बहना योजना और लाडली लक्ष्मी योजनाओं का पूरा लाभ आदिवासी महिलाओं को मिला है. सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि अलीराजपुर में लाडली लक्ष्मी योजनाओं के तहत 44701 और लाडली बहना योजना के माध्यम से अब तक 125567 महिलाओं को लाभ हुआ है. भाजपा सरकार ने केवल लाडली बहना योजना के जरिए 11 करोड़ 81 लाख रुपये अब तक बैंक खाते में अंतरण किया गया है.
आदिवासी इलाकों में सड़कों का निर्माण
इसके साथ ही, डबल इंजन की सरकार ने आदिवासियों के विकास के लिए अन्य योजनाओं में भी काफी मद दिया है। अलीराजपुर में 69.21 किलोमीटर सड़क मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत तो प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से 1225.08 किलोमीटर बनाई गई है. इससे यहां के लोगों को आवागमन में काफी सहूलियत हो गई है. 11 सितंबर को विंध्य, महाकौशल, मालवा, ग्वालियर-चंबल और इंदौर संभाग में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जिस प्रकार उन तक पहुंचा है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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