MP Election 2023: जन आशीर्वाद यात्रा, मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को रिझाने में जुटी शिवराज सरकार

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MP Election 2023: जन आशीर्वाद यात्रा, मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को रिझाने में जुटी शिवराज सरकार

धार जिले की कुक्षी विधानसभा के पूर्व विधायक मुकाम सिंह किराड़े का दावा है कि चुनाव सामने आते ही कांग्रेस एक बार फिर आदिवासी हितों की बात कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने सदैव आदिवासी हितों की उपेक्षा की है.

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मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से चलाई जा रही जन आशीर्वाद यात्रा में केंद्रीय नेताओं के आने से जनता और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है. हालांकि, इस यात्रा के जरिए आदिवासियों को साधने की पूरी कोशिश की जा रही है और आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि, मध्य प्रदेश में आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, जिसका लाभ जनता को मिल रहा है. हालांकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का रत्यक्ष प्रभाव भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा में नजर भी आ रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा की जन आशीर्वाद में ‘डबल इंजन सरकार मतलब राज्य में विकास की दोगुनी रफ्तार’ जैसे संदेश दिए जा रहे हैं.

डबल इंजन सरकार के फायदे गिना रही भाजपा

मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व डबल इंजन सरकार के काम और उसके फायदों से आदिवासी जनता को रू-ब-रू करा रहा है. इससे शीर्ष नेतृत्व को यात्रा के दौरान फायदा भी मिल रहा है. आदिवासी इलाकों में लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. जब केंद्रीय नेता प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यों की प्रशंसा करते हैं, तो आदिवासी लोग भी अपनी सहमति प्रदान करते हैं.

शीर्ष नेतृत्व को जनता का समर्थन

दावा यह भी किया जा रहा है कि आदिवासी इलाकों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है. मध्य प्रदेश में पेसा एक्ट लागू है. इसके अलावा भी प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनजातीय कल्याण की कई योजनाओं ने इन आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर बदली है. इन्हीं योजनाओं का असर आदिवासी इलाकों में पहुंच रही जन आशीर्वाद यात्राओं पर सीधा नजर आ रहा है.

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आदिवासी राग फिर अलाप रही कांग्रेस

धार जिले की कुक्षी विधानसभा के पूर्व विधायक मुकाम सिंह किराड़े का दावा है कि चुनाव सामने आते ही कांग्रेस एक बार फिर आदिवासी हितों की बात कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने सदैव आदिवासी हितों की उपेक्षा की है. एक बार तो जोड़-तोड़ कोशिश से आदिवासी मुख्यमंत्री को अपदस्थ किया और अपनी सरकार बनाई, जबकि दो बार मुख्यमंत्री पद के लिए आदिवासी समाज के नेता की नैसर्गिक दावेदारी छीनी. स्वाधीनता संघर्ष में जिन आदिवासियों ने बलिदान दिया, उन्हें भी कांग्रेस ने कभी उचित सम्मान नहीं दिया.

गरीबों का जीवन सुधारने में केंद्र का साथ दे रही शिवराज सरकार

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर प्रदेश के आदिवासी समुदाय को अब यह पता चल गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीबों के जीवन स्तर को उठाने के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश सरकार भी समान रूप से सहभागिता कर रही है. इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में मध्यप्रदेश अव्वल रहा है. अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना में लाडली बहनों को भी शामिल करने की घोषणा की है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में जिन गरीब बहनों के नाम छूट गए हैं, उनसे आवेदन लेकर लाडली बहना आवास योजना में उन्हें पक्के मकान दिए जाएंगे.

आदिवासी महिलाओं की भागीदारी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों को लेकर कई योजनाओं की शुरुआत की. लाडली बहना योजना और लाडली लक्ष्मी योजनाओं का पूरा लाभ आदिवासी महिलाओं को मिला है. सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि अलीराजपुर में लाडली लक्ष्मी योजनाओं के तहत 44701 और लाडली बहना योजना के माध्यम से अब तक 125567 महिलाओं को लाभ हुआ है. भाजपा सरकार ने केवल लाडली बहना योजना के जरिए 11 करोड़ 81 लाख रुपये अब तक बैंक खाते में अंतरण किया गया है.

आदिवासी इलाकों में सड़कों का निर्माण

इसके साथ ही, डबल इंजन की सरकार ने आदिवासियों के विकास के लिए अन्य योजनाओं में भी काफी मद दिया है। अलीराजपुर में 69.21 किलोमीटर सड़क मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत तो प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से 1225.08 किलोमीटर बनाई गई है. इससे यहां के लोगों को आवागमन में काफी सहूलियत हो गई है. 11 सितंबर को विंध्य, महाकौशल, मालवा, ग्वालियर-चंबल और इंदौर संभाग में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जिस प्रकार उन तक पहुंचा है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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