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शहीद बेटे को सेहरा पहनाकर बैंड-बाजे के साथ दूल्हे की तरह दी अंतिम विदाई

बेटे की शादी के सपने पूरे न कर पाए परिवार ने पार्थिव शरीर को सेहरा और नोटों के हार आदि से दूल्हे की तरह सजाया और बैंडबाजे के साथ अंतिम विदा दी. पूरा घर भी सजाया गया था जैसे शादी हो रही हो.

By संवाद न्यूज एजेंसी
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संवाद

बिलासपुर (हिमाचल) : अरुणाचल प्रदेश में सीमा की रक्षा में तैनात सैनिक की बर्फीले तूफान में शहादत के बाद पैतृक गांव में रविवार सुबह सैनिक व राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई. इससे पहले उसके माता-पिता ने बराती की तरह सजधज कर गांव के करीबी सड़क पर पार्थिव शरीर लेने पहुंचे. बेटे की शादी के सपने पूरे न कर पाए परिवार ने पार्थिव शरीर को सेहरा और नोटों के हार आदि से दूल्हे की तरह सजाया और बैंडबाजे के साथ अंतिम विदा दी. पूरा घर भी सजाया गया था जैसे शादी हो रही हो. घुमारवीं के सेऊ गांव के शहीद अंकेश को अंतिम विदाई दी. बैंड पर दिल दिया है जान भी देंगे ए वतन तेरे लिए धुन बजा. प्रदेश सरकार की तरफ से खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग ने शहीद को श्रद्धांजलि दी. डीएम, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, डीएसपी सहित सेना के अधिकारियों ने सलामी दी.

रविवार को सुबह करीब नौ बजे शहीद अंकेश की पार्थिव देह हमीरपुर-बिलासपुर की सीमा पर पहुंची। बिलासपुर सीमा पर दाखिल होते ही वहां दर्जनों युवकों सहित क्षेत्र भर के लोग भारी तादाद में पहुंच गए थे. युवाओं ने सेना वाहन के आगे बाइक रैली निकालते हुए शहीद को बड़ी शान से घर के नजदीक मुख्य सड़क तक पहुंचाया. मुख्य सड़क से सेना के जवान जब पार्थिव देह घर लाने लगे तो सैकड़ों लोग साथ चले। इस दौरान पूरा गांव शहीद अंकेश अमर रहे, भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा. इसके बाद बेटे को दुल्हा बनाने के अरमानों को पूरा करते हुए माता पिता ने उसे सजाया और उसे अंतिम विदाई दी.

पैदल निकाली तीन किलोमीटर फीट तिरंगा यात्रा

शहीद अंकेश के स्वागत में जिला के युवाओं ने तरघेल से बाइक रैली निकाली. दधोल से सेऊ गांव तक पैदल तीन किलोमीटर 300 फीट के तिरंगे के साथ यात्रा निकाली. इस तिरंगा यात्रा में क्षेत्र के बच्चों, महिलाओं और बूढ़ों ने भाग लिया. तिरंगे के साथ शान से शहीद को उसके आंगन तक पहुंचाया गया। अंकेश की पार्थिव देह को घर से मुक्तिधाम तक एक किलोमीटर खुली जिप्सी में ले जाया गया। रास्ते में लोगों ने पुष्पवर्षा कर अंकेश भरद्वाज अमर रहे के नारे लगाकर उन्हें अलविद कहा.

छोटे भाई ने दी मुखाग्रि

अंकेश के छोटे भाई आकाश भारद्वाज ने अपने भाई को मुखाग्रि दी. 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले छोटे भाई अंकेश अपने भाई को अपना आदर्श मानते हैं. उन्हीं के पदचिह्नों पर चलकर वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। इसके लिए उनके पिता उन्हें ट्रनिंग भी देते हैं.

पिता की इच्छा-दिन में लाया गया पार्थिव शरीर

अरुणाचल प्रदेश कामेंग सेक्टर में बर्फीले तूफान में शहीद हुए अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह हादसे के सातवें दिन शनिवार को पठानकोट एयरबेस पहुंची. यहां सलामी के बाद दोपहर करीब साढ़े बारह बजे घुमारवीं के लिए रवाना की गई. पठानकोट से करीब 6 घंटे के सफर के बाद अंकेश की पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंचनी थी. लेकिन पिता की इच्छा थी कि देश की सीमा की रक्षा करते शहीद हुए बेटे का शरीर दिन के उजाला में लाया जाए ताकि उसका वीरों की तरह स्वागत हो सके. तब प्रशासन की तरफ से हमीरपुर जिले के भोटा रेस्ट हाउस में अंकेश की पार्थिव देह रखी गई और सुबह गांव लाई गई.

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