मणिपुर में कुकी आदिवासियों को दी जाएगी सुरक्षा ? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 03 Jul 2023 7:48 AM

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Manipur Violence : मणिपुर में हिंसा जारी है. इस बीच कुकी आदिवासियों के लिए सुरक्षा की मांग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हो सकती है. मणिपुर के क्या हैं ताजा हालात जानें यहां

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Manipur Violence : गर्मी की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट सोमवार को खुलने जा रहा है. कोर्ट में मणिपुर हिंसा पर याचिकाओं सहित कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हो सकती है. खबरों की मानें तो सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ मणिपुर हिंसा पर याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है, जिसमें अल्पसंख्यक कुकी आदिवासियों के लिए सुरक्षा की मांग की गयी है.

इस बीच आपको बता दें कि प्रदेश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में अज्ञात बंदूकधारियों के साथ गोलीबारी में कम से कम तीन ‘ग्राम स्वयंसेवक’ के मारे जाने की खबर रविवार को आयी. इस हमले में पांच अन्य घायल भी हुए हैं. मामले को लेकर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि खोइजुमंताबी गांव में शनिवार देर रात को यह घटना हुई, जब ‘ग्राम स्वयंसेवक’ अस्थायी बंकर से इलाके की रखवाली में व्यस्त थे. पुलिस की ओर से बताया गया कि शुरुआत में दो शव बरामद किये गये और बाद में एक और शव मिला.

कैसे शुरू हुई मणिपुर में हिंसा

यहां चर्चा कर दें कि पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिये जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किये जाने के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी जिसके बाद से लगातार मौत की खबरें प्रदेश से आ रहीं हैं. मणिपुर की आबादी पर नजर डालें तो यहां 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में निवास करती है. जबकि, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी प्रदेश में 40 प्रतिशत है जो मुख्यत: पर्वतीय जिलों में रहती है.

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दो महीने से जारी नाकेबंदी हटी

इधर, मणिपुर में कुकी समूहों के दो अग्रणी संगठनों ने जानकारी दी कि उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-दो (NH-2) पर कांगपोकपी जिले में दो महीने से जारी नाकेबंदी हटा ली है. इस संबंध में यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. बयान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ‘‘शांति और सद्भाव बहाल करने का आह्वान किये जाने के बाद तत्काल प्रभाव से नाकेबंदी हटा ली गयी.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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