Manipur Violence पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- विस्थापितों का क्या होगा, उन्हें घर वापस लाओ, मांगी रिपोर्ट

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 08 May 2023 6:17 PM

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Manipur-Violence

आदिवासी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आदिवासियों पर हमले हो सकते हैं. इस पर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट स्थिति को स्थिर करना चाहता है.

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Manipur violence : हिंसा प्रभावित मणिपुर में जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. सोमवार को सुबह कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू में ढील दी गयी. इस दौरान इंफाल में लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए अपने घरों से निकले. इधर इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें राज्य की मौजूदा स्थिति के बारे में बताया गया. हिंसा मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखायी और केंद्र और मणिपुर सरकार को प्रभावित लोगों की सुरक्षा बढ़ाने, राहत प्रदान करने तथा उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाने को के लिए कहा. सुनवाई के दौरान आदिवासी संगठन की ओर से आशंका जतायी गयी है कि आदिवासियों पर हमले हो सकते हैं. अब इस मामले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई की तारीख तय की है.

आदिवासी संगठन ने हमले की जतायी आशंका

आदिवासी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आदिवासियों पर हमले हो सकते हैं. इस पर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट स्थिति को स्थिर करना चाहता है.

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा

हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. केंद्र और मणिपुर सरकार ने राज्य में हिंसा से निपटने के लिए उठाये गये कदमों से अवगत कराते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बीते दो दिनों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है. इधर सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केवल कुछ धार्मिक स्थलों को ही नहीं बल्कि हर जगह लोगों और संपत्ति की रक्षा करनी होगी. सॉलिसिटर जनरल ने कहा, शांति बैठक हो चुकी है और लगातार चौकसी बरती जा रही है, सतर्कता के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई चिंताओं को दूर किया जाएगा और सक्रिय आधार पर उपचारात्मक उपाय किए जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने विस्थापितों के पुनर्वास और सुरक्षा पर ध्यान देने का दिया आदेश

मणिपुर हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा की उचित व्यवस्था करने पर जोर दिया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के दौरान विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया. उपासना स्थलों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त कदम उठाने का आदेश दिया.

क्या है मौजूदा स्थिति

मणिपुर में मौजूदा स्थिति के बारे में सरकार ने बताया कि कर्फ्यू में ढील दी गयी है. इस दौरान सेना के ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के जरिए स्थिति पर नजर रखी गई. पिछले कुछ दिनों से जातीय हिंसा से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों में सेना और असम राइफल्स के जवानों ने फ्लैग मार्च किया.

मणिपुर से अबतक कुल 23 हजार लोगों को बाहर निकाला गया

अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर में जारी हिंसा और अराजकता के कारण प्रभावित क्षेत्रों में फंसे करीब 23,000 लोगों को अभी तक निकाला गया है और इन्हें सैन्य छावनियों में भेजा गया है.

मणिपुर में हिंसा की क्या है वजह

गौरतलब है कि मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय द्वारा उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी, जो रातोंरात पूरे राज्य में फैल गई थी. इस हिंसा में कम से कम 54 लोगों की जान चली गई.

मणिपुर में मेइती समुदाय की क्या है स्थिति

मणिपुर की कुल आबादी में मेइती समुदाय की 53 फीसदी हिस्सेदारी होने का अनुमान है। इस समुदाय के लोग मुख्यत: इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत के करीब है तथा वे मुख्यत: इंफाल घाटी के आसपास स्थित पहाड़ी जिलों में रहते हैं.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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