मणिपुर में लापता नगा के शव मिलने के बाद तनाव, आंसू गैस के गोले छोड़े गए

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Jun 2026 8:30 AM

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JNIMS मोर्चरी के बाहर मणिपुर पुलिस के जवान (Photo: ANI)

JNIMS मोर्चरी के बाहर उस समय तनाव बढ़ गया, जब छह नगा लोगों के शव लेने पहुंचे लोगों की भीड़ जमा हो गई. हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. नीचे देखें वीडियो.

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न्यूज  एजेंसी एएनआई के अनुसार, मणिपुर के इम्फाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) की मोर्चरी के बाहर बुधवार को बड़ी संख्या में लोग जुटे. ये लोग छह नगा लोगों के शव लेने पहुंचे थे, जिन्हें 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गांव से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था. हालात को देखते हुए प्रशासन ने जेएनआईएमएस और उसके आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की है, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे.

सर्च ऑपरेशन करीब 24 घंटे तक चला

मणिपुर पुलिस ने एक्स पर जानकारी दी कि करीब 24 घंटे तक चले बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद छह लोगों के शव बरामद किए गए हैं. इस अभियान में मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के करीब 450 जवान शामिल थे. सर्च ऑपरेशन में स्निफर डॉग और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों की भी मदद ली गई. पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान उन लोगों के रूप में की जा रही है, जिन्हें 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गांव से बंधक बनाकर ले जाया गया था. फिलहाल पुलिस आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है.

नगा बंधकों की सुरक्षित रिहाई की अपील मुख्यमंत्रियों ने की थी

पुलिस ने बताया कि मणिपुर के सेनापति जिले में लगभग एक महीने पहले हथियारबंद समूहों द्वारा अगवा किए गए 14 कुकी लोगों को रिहा कराने की घटना के एक दिन बाद इन शवों को बरामद किया गया. नगालैंड और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने 14 कुकी लोगों को रिहा कराने की घटना का स्वागत करते हुए छह नगा बंधकों की सुरक्षित रिहाई की अपील की थी.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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