Lok Sabha Election 2024 : पार्टी से फंड नहीं मिलने पर पुरी से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती ने चुनाव लड़ने से किया इनकार
Sucharita Mohanty
Lok Sabha Election 2024 : सुचारिता ने वेणुगोपाल को पत्र लिखा है और चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. पुरी से बीजेपी के प्रत्याशी संबित पात्रा हैं.
Lok Sabha Election 2024 : पुरी से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती ने पार्टी को बड़ा झटका दिया है और यहां से चुनाव लड़ने से इनकार करते हुए अपना टिकट लौटा दिया है. सुचारिता ने वेणुगोपाल को पत्र लिखा है और चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. सूरत-इंदौर के बाद पुरी से भी कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. पुरी से बीजेपी के प्रत्याशी संबित पात्रा हैं. सुचारिता मोहंती ने कहा कि पार्टी ने उन्हें फंड देने से मना कर दिया है, जिससे उनका चुनाव प्रचार अभियान बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वे अपने दम पर पैसे नहीं जुटा पाईं, इसलिए वे चुनाव नहीं लड़ सकती हैं और अपना टिकट पार्टी को लौटा रही हैं.
सुचारिता ने वेणुगोपाल को लिखा पत्र
सुचारिता पेशे से पत्रकार हैं. उन्होंने केसी वेणुगोपाल को ईमेल करके टिकट लौटाने की बात कही है. सुचारिता ने कहा कि पार्टी उन्हें चुनाव के लिए बिलकुल भी फंड नहीं दे रही है, जिसकी वजह से उन्हें चुनाव प्रचार करने में परेशानी हो रही है. उनके खिलाफ बीजेपी के प्रत्याशी संबित पात्रा चुुनाव मैदान में हैं. फंडिंग की कमी की बात करते हुए सुचारिता ने डोनेशन के लिए एक सोशल मीडिया पोस्ट भी लिखा था. मीडिया में जो सूचना है उसके अनुसार सुचारिता ने अपना टिकट लौटा दिया है. हालांकि पार्टी ने अभी इसपर कोई बयान नहीं दिया है.
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पार्टी पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए
सुचारिता ने कहा कि अगर पार्टी ने उन्हें फंड नहीं दिया तो इसके लिए पार्टी भी जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि बीजेपी सरकार ने उनपर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. बीजद और बीजेपी पानी की तरह पैसा बहा रही है, मैं उनका मुकाबला नहीं कर सकती. पैसे का अश्लील प्रदर्शन हो रहा है. पुरी में जनता से मुझे अच्छा रिस्पांस मिल रहा था, लेकिन आर्थिक संकट को झेलते हुए चुनाव मैदान में मेरे लिए रहना मुश्किल हो गया है. इसलिए मैं चुनाव नहीं लड़ सकती हूं. पिछले चुनाव में पुरी से बीजद के पिनाकी मिश्रा चुनाव जीते थे, उन्होंने संबित पात्रा को शिकस्त दी थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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