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LOCAL SELF-GOVERNANCE: भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न अंग रहा है स्थानीय स्वशासन

Updated at : 03 Jul 2025 8:36 PM (IST)
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LOCAL SELF-GOVERNANCE: भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न अंग रहा है स्थानीय स्वशासन

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शहरी स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि वे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की तरह प्रश्नकाल और जीरो आवर को अपनी कार्यप्रणाली में अपनाएं. उन्होंने कहा, "हम शहरी स्थानीय निकायों की पूरे दिन की बैठकें क्यों नहीं कर सकते? बैठक आठ घंटे तक चल सकती है. इसमें प्रश्नकाल, जीरो आवर हो सकता है. मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तय की जा सकती है.

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LOCAL SELF-GOVERNANCE: मानेसर (गुरुग्राम) में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए नियमित बैठकें करने, सुदृढ़ समिति प्रणालियां विकसित करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं को अपनाने का आह्वान किया गया. 3-4 जुलाई, 2025 को इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी),आईएमटी मानेसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन पूरे भारत के शहरों में भागीदारी पूर्ण शासन संरचनाओं के माध्यम से संवैधानिक लोकतंत्र को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका पर चर्चा करने की ऐतिहासिक पहल है.

पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शहरी स्थानीय निकायों में प्रश्न काल और शून्य काल जैसी सुस्थापित लोकतांत्रिक प्रथाओं को शामिल करने के महत्व पर जोर देते हुए प्रतिनिधियों को बताया कि संसद में ऐसे प्रावधानों ने कार्यपालिका को जवाबदेह बनाए रखने और जनता के सरोकारों को व्यवस्थित रूप से मुखरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस बात का उल्लेख करते हुए कि नगरपालिका की कम अवधि की, अनियमित या तदर्थ बैठकें स्थानीय शासन को कमजोर करती हैं. उन्होंने  नियमित, संरचित सत्रों, स्थायी समितियों के गठन और व्यापक जन परामर्श का समर्थन करते हुए कहा कि संसद की तरह, शहरी स्थानीय निकायों को भी व्यवधानों से बचना चाहिए तथा रचनात्मक और समावेशी चर्चाएं करनी चाहिए.

शहरी क्षेत्रों में 600 मिलियन लोगों के रहने का अनुमान 

बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि 2030 तक 600 मिलियन से अधिक लोगों के शहरी क्षेत्रों में रहने का अनुमान है, इसलिए शहरी शासन का पैमाना और दायरा उसी के अनुसार विकसित किया जाना चाहिए. शहरी स्थानीय निकायों को सेवाएं पहुंचाने की पारंपरिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्व-शासन की सच्ची संस्थाओं के रूप में उभरते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान करना चाहिए. उन्होंने इस बात को दोहराया कि सम्मेलन का विषय-“संवैधानिक लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और राष्ट्र निर्माण में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका” समयोचित और दूरदर्शी है. उन्होंने प्रतिनिधियों से सम्मेलन को नीतिगत संवाद से आगे बढ़कर लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और संस्थागत विकास के मंच के रूप में देखने का आग्रह किया. 

शहरी स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि बुनियादी ढांचे के विकास, सीवेज और सफाई व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे आवश्यक क्षेत्रों में काम करते हुए लोगों के दैनिक जीवन पर कितना महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. ये केवल स्थानीय कार्य नहीं हैं, बल्कि प्रमुख दायित्व हैं जो शहरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं. इन कार्यों को पूरा करने में शहरी स्थानीय निकायों की प्रभावशीलता से न केवल जनता का विश्वास बढ़ता है बल्कि दीर्घकालिक, सतत शहरी विकास का आधार भी मजबूत होता है.

राजनीतिक दल सदन की कार्यवाही में कम करे व्यवधान

संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों से निचले सदन की कार्यवाही में व्यवधान कम करने का आग्रह किया और कहा कि यह समय पुरानी प्रथाओं को बदलने का है. शहरी स्थानीय निकायों के राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लोग उन राजनीतिक दलों को सबक सिखाएंगे जो सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा करते हैं. बिरला ने कहा कि 18वीं लोकसभा में सदन की कार्यवाही में व्यवधान कुछ कम हुआ है, जिसकी पहली बैठक पिछले साल जून में हुई थी. उन्होंने कहा, “परिवर्तन का समय आ गया है. अगर हमें लोकतंत्र को मजबूत करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को जवाबदेह बनाना है, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सदन ठीक से काम करें.”

बिरला ने कहा, सभी राजनीतिक दलों को सदन की कार्यवाही में व्यवधान कम करने के प्रयास करने चाहिए. सरकार आने वाले वर्षों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के कानून को लागू करेगी. “हमें शहरी स्थानीय निकायों में महिला नेताओं को प्रोत्साहित करना होगा क्योंकि यहीं से एक नई राष्ट्रीय नेतृत्व उभरेगा.” उन्होंने उल्लेख किया कि देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल 1922 में राष्ट्रीय व्यक्तित्व बनने से पहले अहमदाबाद नगर निगम के अध्यक्ष थे.

आज के कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री, नायब सिंह, हरियाणा विधान सभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण सहित सांसद, विधायक और अन्य लोग मौजूद थे. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नगरपालिका अध्यक्ष, निर्वाचित प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासक सम्मेलन में शामिल हुए. सम्मेलन के दूसरे दिन चार जुलाई को प्रतिनिधि रिपोर्ट और कार्रवाई योग्य सिफारिशें प्रस्तुत की जायेगी. समापन सत्र को हरियाणा के राज्यपाल, बंडारू दत्तात्रेय और राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश संबोधित करेंगे.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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