लोकसभा चुनाव: कमलनाथ या कांग्रेस! जानें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कौन है मजबूत जहां नहीं चलती मोदी लहर
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 20 Feb 2024 9:48 AM
मप्र विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने खुलेआम कमलनाथ पर सिख विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया था. अब कांग्रेस नेता के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीजेपी का दामन थामने की अटकलें लगाई जा रहीं थीं जिसने राजनीतिक भूचाल ला दिया था. इन अटकलों के बीच कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए पार्टी विधायकों के साथ अहम बैठक करने वाले हैं. वे मंगलवार को प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचने वाले हैं. आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के भविष्य के कदमों पर तीव्र अटकलें लग रहीं हैं, जो इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. अब देखना हैं कि कमलनाथ का आगे का प्लान क्या होता है जिनके नेतृत्व में कांग्रेस ने इस बार विधानसभा चुनाव लड़ा था. इस बीच आइए एक नजर डालते हैं छिंदवाड़ा पर जहां वर्तमान में कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ सांसद हैं और अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं…
छिंदवाड़ा में कांग्रेस या कमलनाथ! कौन है मजबूत
गौर हो कि मध्य प्रदेश की लोकसभा की 29 सीट है जिसमें से 28 पर बीजेपी का कब्जा है. केवल छिंदवाड़ा लोकसभा में कांग्रेस का कब्जा है जहां से नकुलनाथ सांसद हैं. कमलनाथ छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद रह चुके हैं जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका इलाके में कितना दबदबा है. पिछले 43 सालों से वे छिंदवाड़ा की राजनीति से पूरे प्रदेश को साध रहे हैं. 2018 में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद छिंदवाड़ा से 2019 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पहली दफा छिंदवाड़ा से 1980 में लोकसभा के लिए चुने गये थे और 1997 में उपचुनाव में उनकी एकमात्र पराजय के साथ उन्होंने कई दफा इस लोकसभा सीट से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनाव 2019 की बात करें तो इस चुनाव में बीजेपी मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से 28 सीटें जीतने में कामयाब रही लेकिन छिंदवाड़ा से कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ ने 35 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी. इसका मतलब साफ है कि इलाके में केवल कमलनाथ का जादू चलता है. यहां मोदी लहर तक फेल हो जाती है. अपने किले को मजबूत करने के लिए पिता-पुत्र इलाके में खासे सक्रिय नजर आते हैं.
कमलनाथ ने क्या दिया मैसेज
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में कमलनाथ के सहयोगी बार-बार आश्वासन देते नजर आ रहे हैं कि कमलनाथ की पार्टी छोड़ने और सत्तारूढ़ बीजेपी में शामिल होने का कोई प्लान नहीं है. कमलनाथ की ओर से भी इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई और अपने करीबी नेता सज्जन सिंह वर्मा के माध्यम से एक मैसेज दिया कि वह पार्टी छोड़कर नहीं जा रहे हैं. उनके बेटे नकुलनाथ एक बार फिर से छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर ही चुनावी मैदान पर उतरेंगे.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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