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Justice cash row: न्यायाधीश यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष ने गठित की कमेटी

Updated at : 12 Aug 2025 1:19 PM (IST)
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Justice cash row: न्यायाधीश यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष ने गठित की कमेटी

Lok sabha speaker om birla

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले में तीन सदस्यों की समिति का गठन की घोषणा की. कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट में मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बीवी आचार्य को शामिल किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत पद से हटाने का प्रस्ताव है. उनके खिलाफ कदाचार के मामले की शिकायत का प्रस्ताव मिला था.

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Justice cash row: इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने का रास्ता साफ हो गया है. कैश कांड में फंसे न्यायाधीश वर्मा को पद से हटाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले में तीन सदस्यों की समिति का गठन की घोषणा की. कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट में मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बीवी आचार्य को शामिल किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत पद से हटाने का प्रस्ताव है.

उनके खिलाफ कदाचार के मामले की शिकायत का प्रस्ताव मिला था. दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे वर्मा के खिलाफ शिकायत गंभीर प्रकृति की है और ऐसे में न्यायाधीश को हटाने के लिए कार्रवाई की जरूरत है. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद को भ्रष्टाचार के इस विषय में एक स्वर में आवाज उठानी चाहिए. गौरतलब है कि न्यायाधीश वर्मा के आवास पर भारी मात्रा में कैश मिला था. इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने की और आरोप को सही पाया. कमेटी की रिपोर्ट आने तक महाभियोग का प्रस्ताव लंबित रहेगा. 


  
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश वर्मा की याचिका कर चुका है खारिज


सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में जांच का अधिकार नहीं है. हालांकि 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते कहा कि यह सुनवाई के योग्य नहीं है.  दिया था। कोर्ट ने उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था. गौरतलब है कि 14 मार्च को न्यायाधीश वर्मा के नयी दिल्ली स्थित आवास पर जले नोट का मामला सामने आया.

इसके बाद न्यायाधीश वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक कमेटी का गठन किया. इस रिपोर्ट को मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव खन्ना ने सार्वजनिक कर दिया. आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट में न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ आरोप को सही पाया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्यायाधीश वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की सिफारिश की. 

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Vinay Tiwari

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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