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ISRO का ‘बाहुबली’ संचार उपग्रह लॉन्च, समुद्र में नौसेना की आंख बनेगा CMS-03, PM मोदी ने दी बधाई

Updated at : 02 Nov 2025 10:12 PM (IST)
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ISRO: उपग्रह CMS-03 को अंतरिक्ष यान LVM-3-M5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया गया. सबसे भारी होने की वजह से उपग्रह का नाम ‘बाहुबली’ दिया गया है. एलवीएम 3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड जीटीओ तक और 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है.

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ISRO: भारत का बाहुबली प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 आज यानी रविवार (2 नवंबर) को सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. भारतीय नौसेना का GSAT 7R (CMS-03) संचार उपग्रह इंडियन नेवी का अब तक का सबसे उन्नत संचार उपग्रह है. यह उपग्रह नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री अभियान की क्षमताओं को मजबूत करेगा. इसमें कई स्वदेशी और अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की जरूरत को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है. अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) ने बताया कि 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह है. इसे एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया गया है. इसकी गजब की भार उठाने की क्षमता को देखते हुए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है.

पीएम मोदी ने दी बधाई

इसरो की इस कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी टीम को बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा ‘इसरो हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र हमें निरंतर गौरवान्वित करता है! भारत के सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई. हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की बदौलत, यह सराहनीय है कि हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र उत्कृष्टता और नवाचार का पर्याय बन गया है. उनकी सफलताओं ने राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाया है और अनगिनत लोगों को सशक्त बनाया है.’

क्यों कहा जा रहा है ‘बाहुबली’ उपग्रह

इसरो ने बताया कि 4,000 किलोग्राम तक भारी पेलोड ले जाने की क्षमता के कारण CMS-03 को ‘बाहुबली’ नाम से पहचाना जा रहा है. यह 43.5 मीटर लंबा यान है. इसरो ने बताया कि एलवीएम3 इसरो का भारी वजन वहन करने वाला नया प्रक्षेपण यान है और इसका उपयोग 4,000 किलोग्राम के अंतरिक्ष यान को किफायती तरीके से जीटीओ में स्थापित करने के लिए किया गया है. हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि उपग्रह का इस्तेमाल सैन्य निगरानी के लिए भी किया जाएगा, लेकिन इस मामले पर इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भरता

दो ठोस मोटर ‘स्ट्रैप-ऑन’ (एस 200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (एल 110) और एक क्रायोजेनिक चरण (सी25) वाला यह तीन चरणीय प्रक्षेपण यान इसरो को जीटीओ में 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भर बना रहा है. एलवीएम3- को इसरो के वैज्ञानिक भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) एमके3 भी कहते हैं. इसरो ने कहा कि एलवीएम3-एम5 पांचवीं अभियानगत उड़ान है.

अब तक का सबसे भारी उपग्रह

 इससे पहले इसरो ने पांच दिसंबर 2018 को एरियन-5 वीए-246 रॉकेट के जरिये फ्रेंच गुयाना के कौरू प्रक्षेपण केंद्र से अपने सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-11 को प्रक्षेपित किया था. करीब 5,854 किलोग्राम वजनी जीसैट-11 इसरो की ओर से निर्मित सबसे भारी उपग्रह है. इसरो ने कहा कि आज (रविवार) के मिशन का मकसद बहु-बैंड संचार उपग्रह सीएमएस-03 भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा. एलवीएम-3 रॉकेट ने इससे पहले चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया था, जिसके जरिये भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बन गया था. (इनपुट भाषा)

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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