ट्रंप की धमकी के बाद ईरान का आश्वासन, दुश्मनों के अलावा सभी देशों के जहाज होर्मुज स्ट्रेज से गुजरेंगे

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Strait of Hormuz : ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर अपने रुख में थोड़ी नरमी दिखाई है, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि संभवत: विश्व पर मंडरा रहा ऊर्जा संकट कुछ कम होगा. हालांकि अभी यह निश्चत तौर पर नहीं कहा जा सकता है क्योंकि ईरान ने यह कहा है कि वह दुश्मन देश के अलावा अन्य सभी देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा.

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Strait of Hormuz : दुश्मन देश के जहाजों को छोड़कर अन्य सभी देश के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से जा सकेंगे. यह बयान ईरान की ओर से तब जारी किया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि समुद्री मार्ग को अगर पूरी तरह नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट को निशाना बनाया जाएगा.


ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने कहा कि दुश्मन देशों के जहाज के अलावा अन्य किसी भी देश के जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा. यहां दुश्मन कहने का ईरान का आशय स्पष्ट रूप से अमेरिका और इजरायल हैं. ईरान के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रतिनिधि अली मौसवी ने स्पष्ट किया है कि जो जहाज ईरान के दुश्मनों से जुड़े नहीं हैं, उन्हें सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेज से गुजरने दिया जाएगा. मौसवी ने यह भी कहा कि ईरान जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग करने को तैयार है.


हर महीने लगभग 3000 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं

होर्मुज स्ट्रेट से हर महीने लगभग 3000 जहाज गुजरते हैं, लेकिन 28 फरवरी से यह मार्ग बंद तो नहीं, हां बाधित जरूर है. ईरान ने कुछ जहाजों पर हमला भी कर दिया है, जिसकी वजह से इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित है. यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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