मां ने 3 बच्चों को सूट–गाॅगल्स पहनाकर तैयार किया, फिर कर दी हत्या; अपनी जान भी दी
केरल में पहले 3 बच्चों को मारा, फिर कर ली आत्महत्या
Kerala Vaduthala case : कोच्चि के एक दो मंजिला घर में अश्वथी नायर अपने तीन बच्चों और मां के साथ किराए पर रहती थी. शनिवार को जब उनके घर में सुबह से कोई हलचल नहीं हुई, तो मकान मालिक ने उत्सुकतावश उनके घर का दरवाजा खटखटाया, तो वह खुला हुआ था, उसने अंदर प्रवेश किया, तो उसकी हालत खराब हो गई है. अश्वथी नायर, उसकी मां और तीन बच्चे मृत अवस्था में पड़े हुए थे.
Kerala Vaduthala case : केरल के कोच्चि शहर से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर पूरे समाज को शर्मसार कर दिया और यह सवाल भी छोड़ा है कि आखिर हम किस ओर जा रहे हैं. मनोवैज्ञानिक भूमिका सच्चर का का मानना है कि इंटरनेट और सिकुड़ते परिवार की वजह से आम भारतीय बहुत ही एकांकी जीवन जीता है, उसपर पैसे की तंगी से वह परेशान रहता है. पूरे परिवार द्वारा जान देने की घटनाएं इसी वजह से भारतीय समाज में बढ़ रही हैं.
एक ही परिवार के 5 लोग घर में मृत पाए गए
दि हिंदू अखबार में छपी खबर के अनुसार कोच्चि के वदुथला में शनिवार को एक ही परिवार के पांच सदस्य, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं, अपने किराए के मकान में मृत पाए गए हैं. इस केस में सुसाइड और मर्डर दोनों का ही एंगल नजर आ रहा है. मारे गए लोगों में एक महिला उनकी मां और तीन बच्चे शामिल हैं, जिनकी उम्र 14, 4 और दो साल बताई जा रही है.एर्नाकुलम टाउन नॉर्थ पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है. पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार सुबह सामने आई जब घर के अंदर से काफी समय तक कोई हलचल नहीं होने पर मकान मालिक को शक हुआ. उसने दरवाजा खोलकर अंदर देखा गया, तो पूरा परिवार मृत अवस्था में मिला. प्रारंभिक जांच में इसे हत्या और आत्महत्या (मर्डर-सुसाइड) का मामला माना जा रहा है. दोनों महिलाओं ने फांसी लगाकर जान दी है.
चौंकाने वाला है घर का दृश्य
इस आत्महत्या और हत्या के केस में सबसे चौंकाने वाला पक्ष है घर के अंदर का दृश्य. पुलिस ने बताया है कि मृत लोगों में से एक महिला ने अच्छी साड़ी पहनी हुई है और काफी सजधज कर तैयार है. उसने अपने तीनों बच्चों को भी अच्छे से तैयार किया है. वे अच्छे कपड़े पहने हैं. बच्चों ने अच्छा सूट पहना है और गाॅगल्स लगाकर बिस्तर पर लेटे हुए हैं. तीन बच्चों में से दो बेड पर मिले हैं, जबकि बड़ा बच्चा दूसरे कमरे में फर्श पर चादर बिछाकर लेटा हुआ है. शवों का इस हालात में बरामद होना कई अनसुलझे रहस्यों को जन्म दे रहा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार मृतक परिवार मूल रूप से तिरुवनंतपुरम का रहने वाला बताया जा रहा है. वे कुछ महीनों से कोच्चि में रह रहे थे. जानकारी के अनुसार वे किसी सदस्य के इलाज के सिलसिले में यहां आए थे और पास के एक निजी अस्पताल से जुड़े हुए थे. मृतक महिलाओं की पहचान अश्वथी नायर (36) और उसकी मां श्रीकुमारी (58) के रूप में की गई है.
महिलाओं ने पहले बच्चों को मारा और फिर आत्महत्या की
कोच्चि का यह केस असाधारण तरीके का है. इस केस की शुरुआती जांच में पुलिस ने यह शंका जताई है कि महिलाओं ने पहले तीनों बच्चों को अच्छे से तैयार करके उनकी हत्या की और फिर उन्हें बिस्तर पर लिटाकर खुद आत्महत्या कर ली. अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है, आशंका है कि बच्चों को जहर देकर मारा गया है. यह दर्दनाक घटना समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और मदद की जरूरत को उजागर करने वाली प्रतीत होती है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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