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Innovation: भारत बना दुनिया पहला बायो-बिटुमेन उत्पादक देश

Updated at : 07 Jan 2026 7:08 PM (IST)
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Innovation: भारत बना दुनिया पहला बायो-बिटुमेन उत्पादक देश

सरकार लंबे समय से कृषि अवशेष से बायो-बिटुमेन बनाने की कोशिश में जुटी थी. अब इस दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. भारत व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है. इस उपलब्धि से देश के किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं बल्कि सड़क निर्माता की भूमिका भी निभाएंगे.

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Innovation: आने वाले दिनों में देश के सड़क निर्माण में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. सरकार लंबे समय से कृषि अवशेष से बायो-बिटुमेन बनाने की कोशिश में जुटी थी. अब इस दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. भारत व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है. इस उपलब्धि से देश के किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं बल्कि सड़क निर्माता की भूमिका भी निभाएंगे. बुधवार को ‘कृषि अवशेषों से सड़क तक: पायरोलिसिस से बायो-बिटुमेन’ विषय पर सीएसआईआर के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित करने का समय आ गया है. 

बायो-बिटुमेन विकसित भारत 2047 के विजन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके बनने वाले बायो-बिटुमेन से फसल जलाने के मामले में कमी आएगी और इससे प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी. पराली अब सरकार और किसानों के लिए समस्या नहीं बल्कि वेल्थ बनेगी. नयी तकनीक से 600 मिलियन टन से अधिक कृषि अवशेष का उपयोग सड़क निर्माण में होगा. इससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. बायो-बिटुमेन के 15 फीसदी मिश्रण से सरकार को लगभग 4500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने में भी मदद मिलेगी. 

इनोवेशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

मौजूदा समय में भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 40 फीसदी बिटुमेन आयात करता है और इस पर हर साल लगभग 35 हजार करोड़ रुपये खर्च होता है. देश में जिस तेजी से सड़कों का निर्माण हो रहा है, उससे बिटुमेन की मांग 100 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है. बायो-बिटुमेन का प्रयोग बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ आयात को भी कम करने में मददगार साबित होगा. 
गडकरी ने कहा कि यह इनोवेशन किसानों को सशक्त बनाएगा, ग्रामीण आजीविका उत्पन्न करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा. बायो-बिटुमेन सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो स्वच्छ और हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है. 


बायो-बिटुमेन का प्रयोग वर्ष 2024 में परीक्षण के लिए किया जा चुका है और यह परीक्षण सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि बायो-बिटुमेन से बनी सड़कों अधिक मजबूत होती है. कई देश इस क्षेत्र में रिसर्च कर रहे हैं. लेकिन भारत ने इस क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल कर दुनिया में अग्रणी स्थान बना लिया है. 

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Anjani Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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