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कैसी होगी अटल टनल की सुरक्षा, राज्य सरकार सुरक्षा को लेकर गंभीर

By संवाद न्यूज एजेंसी
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अटल टनल की सुरक्षा
अटल टनल की सुरक्षा
फाइल फोटो

शिमला : चीन सीमा पर जवानों को आसानी से सैन्य उपकरण पहुंचाने में सहायक अटल टनल की सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है. इसके लिए पारा मिलिट्री फोर्स को तैनात किया जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस टनल का उद्घाटन किया है. अब राज्य सरकार इस टनल की सुरक्षा को लेकर गंभीर है.

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए अधिकारियों की विशेष समिति ने कई सिफारिशें की हैं. पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर गठित अधिकारियों के बोर्ड की सिफारिशों संरकार मंथन कर रही है. इस बोर्ड में डीजीपी के अलावा सीआईडी प्रमुख, लाहौल व कुल्लू जिलों के एसपी और आईबी के अधिकारी शामिल हैं. सभी के सुझावों के आधार पर टनल के नॉर्थ व साउथ पोर्टल पर पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के पोस्ट बनाने का सुझाव दिया गया है.

उद्घाटन के बाद से टनल से गुजरने वाले ट्रैफिक पर नजर रखी जा रही है. इसके बाद ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती पर फैसला होगा. समन्वय के लिए भी अफसर तैनात करने पर विचार किया जा रहा है, जो टनल के दोनों छोर पर तैनात लाहौल-स्पीति व कुल्लू जिले के पुलिस कर्मियों के बीच पुल का काम करे. पुलिस के लिए इस सुरंग की सुरक्षा एक चुनौती है. जिसके लए खास इंतजाम किए जाएंगे.

अटल टनल में सीसीटीवी लगाए गए हैं. इसके अलावा टनल से गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग की भी व्यवस्था की जा रही है. टनल के अंदर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों और सुरक्षा जवानों को तैनात करने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है. टनल से सेना के वाहनों के गुजरने के दौरान सामान्य वाहनों के मूवमेंट को रोका जा सकता है. टनल के अंदर जाने वाले हर वाहन की आधुनिक उपकरणों से चेकिंग के लिए भी सुझाव दिए गए हैं.

ग्लेशियरों को नया जीवन मिलेगा

अटल टनल से रोहतांग दर्रे में प्रदूषण घटने की संभावना है. इससे इस क्षेत्र के ग्लेशियरों को नया जीवन मिल सकेगा. मनाली-मढ़ी से रोहतांग दर्रा होकर जाने वाले हजारों वाहन अब सीधे टनल से होकर निकल जाएंगे. ऐसे में बर्फ से लकदक रहने वाले रोहतांग दर्रे में 75 फीसदी तक प्रदूषण कम हो जाएगा.

बर्फ काली पड़ जाती है. यही कारण है कि एनजीटी ने भी समर सीजन में सिर्फ 1500 वाहनों को ही रोहतांग दर्रे में जाने की अनुमति दी थी. रोहतांग से होकर कम वाहनों के गुजरने से अब दर्रे के आसपास ग्लेशियरों को ताकत मिलेगी और उन्हें प्रदूषण से नुकसान नहीं होगा. जीबी पंत संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीसी कुनियाल ने कहा कि रोहतांग दर्रे में ग्लेशियरों का पिघलना व बर्फ की परत का काला पड़ने का कारण वाहनों की भारी आवाजाही ही थी. अब टनल बनने से ग्लेशियरों को नया जीवन मिल सकता है.

Posted By - Pankaj Kumar Pathak

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