No Confidence Motion : पीएम मोदी से कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल,अबतक मणिपुर क्यों नहीं गये? कब तोड़ेंगे मौनव्रत

गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखे हमले करते हुए तीन सवाल पूछे. गौरव गोगोई ने कहा कि मणिपुर में उनकी डबल इंजन की सरकार बेकार है. वे जनता के हित में काम नहीं कर रही है. प्रदेश हिंसा की आग में जल रहा है, अबतक 150 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं
नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के गौरव गोगोई ने की, हालांकि पहले ऐसी चर्चा थी कि राहुल गांधी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करेंगे. लेकिन कांग्रेस के सांसद तरुण गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की, जो असम से सांसद हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव लाना हमारी मजबूरी है. उन्होंने कहा कि मुद्दा संख्या बल का नहीं बल्कि मणिपुर के लिए इंसाफ का है. मणिपुर जल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौनव्रत पर हैं.
गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखे हमले करते हुए तीन सवाल पूछे. गौरव गोगोई ने कहा कि मणिपुर में उनकी डबल इंजन की सरकार बेकार है. वे जनता के हित में काम नहीं कर रही है. प्रदेश हिंसा की आग में जल रहा है, अबतक 150 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. स्कूल बंद हैं, इंटरनेट बाधित है. उन्होंने कहा कि मणिपुर के युवा उनसे न्याय मांगते हैं. आखिर वे मणिपुर पर चुप्पी क्यों साधकर रखे हैं. हम मणिपुर मुद्दे पर उनकी चुप्पी तोड़ने के लिए यह अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये हैं.
गौरव गोगोई ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी से सवाल किया कि आखिर क्यों प्रधानमंत्री ने मणिपुर का दौरा नहीं किया. उन्होंने पीएम से यह सवाल भी किया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को पद से क्यों नहीं हटाया गया जबकि चुनावी राज्यों खासकर गुजरात और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदले गये.
गौरव गोगोई ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मौन रहना चाहते हैं क्योंकि उन्हें सिर्फ अपनी छवि से लगाव है और वह अपनी सरकार की विफलताओं को सामने नहीं आने देना चाहते. कांग्रेस सांसद ने कहा, मैं इस अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों का आभार प्रकट करता हूं. गौरव गोगोई ने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव हम मणिपुर के लिए लाए हैं. आज मणिपुर इंसाफ मांगता है, मणिपुर के युवा, महिलाएं इंसाफ चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि अगर आज मणिपुर जल रहा है तो भारत जल रहा है. अगर मणिपुर में आग लगी है, मणिपुर विभाजित हुआ तो भारत में आग लगी है, भारत विभाजित हुआ है.
कांग्रेस नेता ने कहा, हमारी मांग थी कि देश के मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री बयान दें और मणिपुर के लोगों को यह संदेश दिया जाए कि दुख की घड़ी में हम मणिपुर में उनके साथ थे. लेकिन प्रधानमंत्री मौनव्रत पर हैं और कुछ मंत्री बोलना चाहते हैं. लेकिन मैं माफी के साथ यह कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री के संदेश में जो बात होगी, जो प्रभाव होगा वह किसी मंत्री या सांसद के संदेश में नहीं होगा, इसलिए हम प्रधानमंत्री का वक्तव्य चाहते हैं.
मणिपुर पर पीएम मोदी ने बोलने में 80 दिन लगा दिये और जब बोले तो सिर्फ 30 सेकेंड के लिए बोला. आखिर क्यों? उन्होंने कहा, मणिपुर में कोई पहली बार हिंसा नहीं हुई है. लेकिन समाज के दो वर्गों के बीच बंटवारा हमने कभी नहीं देखा था. कांग्रेस नेता ने कहा, आज इस राजनीति से दो मणिपुर बन गए हैं. मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संदेश मणिपुर के मुख्यमंत्री को देना चाहता हूं कि राजधर्म निभाया जाए.
उन्होंने दावा किया कि अगर मणिपुर में वीडियो वायरल नहीं होता तो प्रधानमंत्री नहीं बोलते चुप्पी साधे रहते. उन्होंने आरोप लगाया, प्रधानमंत्री को छवि से लगाव है, इसलिए वह मौन रहें. प्रधानमंत्री मोदी के मौन रहने का दूसरा कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विफल रहे हैं. कांग्रेस नेता के अनुसार, जाति, समुदाय और धर्म के आधार पर बंटवारा किया जाएगा तो पूर्वोत्तर में समस्याओं का समाधान नहीं होगा.
गोगोई ने कहा, यह कैसा राष्ट्रवाद है जो देश से ज्यादा सत्ता को महत्व देता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में आकर बयान दें और मणिपुर का दौरा करें और अपने साथ सभी दलों के लोगों को लेकर आएं. गोगोई ने कहा, आज आप भाजपा जितना भी नफरत फैलाएं, हम राहुल गांधी जी के नेतृत्व में जगह-जगह मोहब्बत की दुकान खोलेंगे. हमारा राष्ट्रवाद यह है कि देश में शांति बहाल हो और नफरत की दुकान बंद हो.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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