हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को सुनाई खरी-खरी, कहा- केंद्र सरकार का विरोध करना जुर्म नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट (File Photo)
एसडीपीआई नेता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी की एक याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सरकार के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर कोर्ट ने टिप्पणी की.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को मुंबई पुलिस के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक राजनीतिक कार्यकर्ता को मुंबई से तड़ीपार किया गया था. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ रैली या प्रदर्शन आयोजित करना किसी व्यक्ति को तड़ीपार करने का आधार नहीं बन सकता. कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे आधार पर कार्रवाई करना नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.
एसडीपीआई के महासचिव 49 वर्षीय सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस माधव जमदार ने यह टिप्पणी की. जस्टिस ने कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना या नारे लगाना किसी व्यक्ति को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत तड़ीपार करने का आधार नहीं हो सकता. कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से पूछा कि “बीजेपी सरकार मुर्दाबाद” और “अमित शाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाने को किसी व्यक्ति को तड़ीपार करने का आधार कैसे बनाया जा सकता है.
किन मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे थे सईद अहमद
चेंबूर निवासी सईद अहमद लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं. उनके खिलाफ 2019 से 2024 के बीच कई एफआईआर दर्ज होने के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए मुंबई शहर, उपनगरों और आसपास के इलाकों से तड़ीपार कर दिया था. सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामले नागरिकता संशोधन कानून (CAA), एनआरसी, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, बाबरी मस्जिद विध्वंस, वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और बढ़ती ईंधन कीमतों जैसे मुद्दों पर हुए प्रदर्शनों से जुड़े थे.
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चौधरी की ओर से पेश वकील पयोशी रॉय ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं. इनमें ज्यादातर मामले केंद्र सरकार के फैसलों के विरोध में प्रदर्शन करने से जुड़े थे. उन्होंने बताया कि ये केस भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दर्ज किए गए, जो सरकारी आदेशों की अवहेलना से संबंधित है.
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By अमिताभ कुमार
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