घर में रखे सोने से होगी कमाई? आसान भाषा में समझिए क्या है नई गोल्ड मोनेटाइजेशन पॉलिसी
मान लीजिए आपके घर में शादी के समय के कुछ पुराने गहने पड़े हैं. मां की पुरानी चूड़ियां, पिता का खरीदा हुआ सोने का सिक्का या सालों से लॉकर में रखा कुछ सोना. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर में रखा यह सोना आपके कितने काम का है? खासकर तब, जब आप इसका इस्तेमाल भी नहीं करते.
घर की तिजोरी या बैंक लॉकर में रखा सोना आम तौर पर सिर्फ एक संपत्ति होता है. इसकी कीमत भले ही समय के साथ बढ़ती रहे, लेकिन जब तक आप इसे बेचते नहीं हैं, इससे कोई नियमित कमाई नहीं होती. लेकिन, ऐसे सोने से कमाई का एक विकल्प गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम है. इस योजना के तहत तय प्रक्रिया के जरिए सोना बैंक में जमा किया जा सकता है और उस पर ब्याज कमाया जा सकता है.
तो आखिर क्या है यह योजना, इसमें अपना सोना कैसे जमा किया जा सकता है और सबसे जरूरी सवाल, क्या आपके लिए इसमें सोना जमा करना फायदे का सौदा है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं.
नई योजना में क्या बदलने वाला है?
- सरकार और ज्वेलरी उद्योग के बीच चल रही बातचीत का मकसद ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें आम लोगों के लिए सोना जमा कराना आसान हो.
- प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहक अपने भरोसेमंद ज्वेलर के पास सोना जमा कर सकता है. वहां सोने की जांच और मूल्यांकन के बाद उसकी जानकारी डिमैट खाते में दर्ज किए जाने की योजना है.
- इसके बदले जमाकर्ता को जमा किए गए सोने के मूल्य पर ब्याज मिल सकता है. यानी घर में लॉकर या अलमारी में पड़े सोने से कमाई का रास्ता खुल सकता है.
- हालांकि, अभी ब्याज दर, जमा अवधि, सोने की शुद्धता जांच, कर व्यवस्था और योजना की पूरी शर्तों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इसलिए ब्याज कितना मिलेगा, यह अभी तय मानना सही नहीं होगा.
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ज्वेलर्स को क्यों बनाया जा रहा है अहम कड़ी?
- सरकार की पुरानी गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना में बैंकों और अधिकृत परीक्षण केंद्रों की बड़ी भूमिका थी. लेकिन आम लोगों की भागीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही.
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक पुरानी योजना के तहत करीब 38 टन सोना ही जुटाया जा सका था.
- नई सोच में ज्वेलर्स को आगे लाने की वजह लोगों का भरोसा माना जा रहा है. भारत में बहुत से परिवार लंबे समय से अपने स्थानीय ज्वेलर से खरीदारी, बिक्री और पुराने गहनों के लेनदेन करते हैं.
- ऐसे में बैंक की शाखा या अलग परीक्षण केंद्र जाने के बजाय परिचित ज्वेलर के पास सोना जमा कराने की व्यवस्था ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है.
- ज्वेलरी उद्योग का मानना है कि अगर प्रक्रिया सरल और भरोसेमंद बनाई गई, तो इससे योजना में लोगों की भागीदारी काफी बढ़ सकती है.
भारत के घरों में कितना सोना रखा है?
- भारत में घरेलू स्तर पर रखे सोने का कोई आधिकारिक और सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 20,000 टन से ज्यादा सोना हो सकता है.
- यही वजह है कि सरकार इस सोने को अर्थव्यवस्था के लिए संभावित बड़े संसाधन के तौर पर देख रही है. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर घरेलू सोने का केवल 10 प्रतिशत भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में आ जाए, तो उसकी कीमत सैकड़ों अरब डॉलर के बराबर हो सकती है.
- इससे एक तरफ सोने के आयात पर निर्भरता घट सकती है और दूसरी तरफ देश में निवेश के लिए घरेलू पूंजी उपलब्ध हो सकती है.
इससे भारत को क्या फायदा हो सकता है?
- भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है. घरेलू सोना अगर योजना के जरिए इस्तेमाल होने लगे तो नए सोने की मांग और आयात पर दबाव कम किया जा सकता है.
- इसका असर देश के चालू खाते के घाटे, विदेशी मुद्रा की जरूरत और व्यापार संतुलन पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा, अगर घरेलू बचत का एक हिस्सा सोने से निकलकर वित्तीय व्यवस्था में आता है, तो बैंकिंग और निवेश प्रणाली में पूंजी की उपलब्धता बढ़ सकती है.
- विशेषज्ञों का तर्क है कि यह पूंजी उद्योगों, कंपनियों और दूसरे उत्पादक क्षेत्रों में निवेश के लिए इस्तेमाल हो सकती है. लंबे समय में इससे आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
सिक्के और गोल्ड बार को लेकर क्या है पेंच?
- प्रस्ताव में आभूषणों के साथ सोने के सिक्के और बार को भी शामिल करने की चर्चा है. इससे योजना का दायरा बढ़ सकता है, लेकिन यही बात सरकार के लिए चिंता का कारण भी बन रही है.
- अगर निवेश के लिए खरीदे गए सिक्के और बार भी जमा करके ब्याज कमाने की सुविधा मिलती है, तो लोग पहले नया सोना खरीद सकते हैं और फिर उसे योजना में जमा कर सकते हैं. इससे सोने की आयात मांग घटने के बजाय बढ़ सकती है.
- यही वजह है कि योजना में सिक्कों और बार को शामिल करने के नियमों पर अभी विचार चल रहा है.
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ज्वेलर्स को क्या मिलेगा?
- ज्वेलर्स को योजना में सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए प्रोत्साहन राशि देने का सुझाव भी सामने आया है. उद्योग जगत की चर्चाओं के मुताबिक, रिफाइनर की ओर से ज्वेलर्स को लगभग 0.75 से 1 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने की संभावना पर चर्चा हुई है.
- इससे ज्वेलर्स को ग्राहकों को योजना समझाने और सोना जमा कराने के लिए प्रेरित करने में आर्थिक फायदा मिल सकता है. वहीं रिफाइनर को ज्यादा मात्रा में सोना मिलने से उसके कारोबार का पैमाना बढ़ सकता है.
योजना कब शुरू होगी?
- अभी योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, सरकार इसके ढांचे पर काम कर रही है और इसे अगस्त के अंत तक या अक्टूबर में शुरू होने वाले त्योहारी सीजन से पहले लाने की संभावना जताई जा रही है.
- लेकिन अंतिम फैसला ब्याज दर, शुद्धता जांच, कर नियम, ज्वेलर्स की जिम्मेदारी और सोने की कीमत तय करने की प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर निर्भर करेगा.
- नई गोल्ड मोनेटाइजेशन योजना का लक्ष्य सिर्फ लोगों को सोने पर ब्याज देना नहीं है. असली मकसद घरों में निष्क्रिय पड़े विशाल सोने को अर्थव्यवस्था में वापस लाना, आयात की जरूरत घटाना और घरेलू पूंजी को निवेश के लिए उपलब्ध कराना है.
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लेखक के बारे में
By गौतम कुमार
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