दावा किया जाता है कि पाकिस्तान में महिलाओं का सोशल मीडिया इस्तेमाल करना मौत को दावत देने जैसा है.इस दावे के कई और पहलू हैं, लेकिन हाल के वर्षों में शमसो बीबी से लेकर सना यूसुफ तक की मौतों ने इस बहस को जरूर तेज कर दिया है. दरअसल, पाकिस्तानी टिकटॉक क्रिएटर शम्सो बीबी की हत्या के बाद एक बार फिर पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.पूछा जा रहा है कि क्या पाकिस्तान में किसी महिला का सोशल मीडिया पर एक्टिव होना ही उसके लिए खतरा बन गया है? कुछ मामलों में महिलाओं की ऑनलाइन मौजूदगी और हिंसा के बीच सीधा कनेक्शन सामने आता है, जबकि कुछ मामलों में हत्या की वजह को सीधे सोशल मीडिया से जोड़ना जल्दबाजी होगी. इसलिए असली सवाल सिर्फ सोशल मीडिया का नहीं, बल्कि महिलाओं की आजादी, पुरुषवादी सोच और तथाकथित इज्जत के नाम पर होने वाली हिंसा का भी है.पहले समझिए शम्सो बीबी के मामले में क्या हुआ14 अगस्त 2026 को टैक्सिला इलाके में शम्सो बीबी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह टिक टॉक पर काफी लोकप्रिय थीं.सोशल मीडिया पर वह आयशा गिलामना के नाम से जानी जाती थीं। रिपोर्टों के मुताबिक उनके करीब 13 लाख फॉलोअर्स थे.घटना के वक्त वह अपने भाई और बहन के साथ कार में थीं. तभी बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार पर फायरिंग कर दी. गोली लगने के बाद कार एक डंप ट्रक से जा टकराई. शमसो बीबी की मौत हो गई, जबकि उनकी बहन घायल हुईं.लेकिन यहां एक जरूरी बात है. अभी तक सामने आई पुलिस जानकारी में यह साबित नहीं हुआ है कि शमसो बीबी को उनकी टिकटॉक एक्टिविटी की वजह से मारा गया. शुरुआती जांच में पुलिस कथित आर्थिक विवाद और धमकियों के एंगल पर भी काम कर रही है.यानी फिलहाल यह कहना कि टिक टॉक की वजह से शमसो बीबी की हत्या हुई, फैक्ट के हिसाब से जल्दबाजी होगी.ये भी पढ़ें: कपड़े, पढ़ाई और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी, अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए कितनी मुश्किल है जिंदगी?सना यूसुफ की हत्या का सोशल मीडिया कनेक्शनइससे करीब एक साल पहले सामने आया सना यूसुफ का मामला इस बहस को और गंभीर बना देता है. 17 साल की सना टिक टॉक और इंस्टाग्राम पर कंटेंट बनाती थीं. 2 जून 2025 को इस्लामाबाद में उनके घर के अंदर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई.पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी उमर हयात सना से संपर्क करना चाहता था. सना ने उसकी बात नहीं मानी और उससे मिलने से इनकार कर दिया. इसके बाद आरोपी ने उनकी हत्या कर दी.इस मामले की सबसे परेशान करने वाली बात सिर्फ हत्या नहीं थी. हत्या के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सना को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया.यानी एक लड़की की हत्या हुई और उसके बाद इंटरनेट पर उसके कपड़ों, वीडियो और सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए गए.टिक टॉक को लेकर परिवारों में भी टकरावऐसा ही एक और मामला जनवरी 2025 में क्वेटा से सामने आया. पुलिस के मुताबिक एक किशोरी की उसके पिता ने हत्या कर दी. जांच में यह बात सामने आई कि परिवार उसके टिक टॉक वीडियो से नाराज था.जानकारों का दावा है और कई दूसरे मीडिया रिपोर्ट बताती है कि ऐसे मामलों की संख्या एक दो नहीं है.इसके पीछे जो सबसे बड़ी वजह है वो ये कि कुछ परिवारों में लड़कियों की ऑनलाइन मौजूदगी को परिवार के कथित इज्जत से जोड़कर देखा जाता है?यानी अगर कोई लड़की वीडियो बनाती है, अपनी तस्वीर पोस्ट करती है या अपनी पसंद की जिंदगी जीती है, तो पाकिस्तान में कुछ लोग इसे परिवार के लिए शर्म की बात मानते हैं. और यही सोच कई बार बेहद खतरनाक रूप ले लेती है.ये भी पढ़ें: अमेरिका में कैसे होती है वोटिंग? समझिए, ट्रंप ने क्यों दिया भारत के चुनावी मॉडल का उदाहरणसिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है पूरी तस्वीरयहां आंकड़ों को देखना भी जरूरी है. पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा कोई नई समस्या नहीं है. ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक 2024 में कम से कम 405 महिलाओं की हत्या तथाकथित ऑनर किलिंग के मामलों में हुई.2025 के पहले छह महीनों में 700 से ज्यादा महिलाओं की हत्या की रिपोर्ट हुई. इनमें करीब एक चौथाई मामले तथाकथित ऑनर किलिंग से जुड़े बताए गए. इसी दौरान कम से कम आठ महिलाओं की हत्या को सोशल मीडिया इस्तेमाल से जोड़कर देखा गया.इन आंकड़ों से एक बात साफ होती है कि सोशल मीडिया अकेले महिलाओं की हत्या की वजह नहीं है. लेकिन कुछ मामलों में यह महिलाओं की आजादी और उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश के बीच टकराव का नया मैदान जरूर बन गया है.मौत के बाद भी क्रिएटर्स को नहीं छोड़ता इंटरनेटमहिला क्रिएटर्स के लिए खतरा सिर्फ असल जिंदगी तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग, धमकियों और चरित्र पर सवालों का सामना भी करना पड़ता है. सना यूसुफ की हत्या के बाद भी ऐसे कमेंट सामने आए जिनमें उनकी सोशल मीडिया मौजूदगी को ही उनकी हत्या से जोड़ने की कोशिश की गई. जानकार इस तरह की चीजों को विक्टिम ब्लेमिंग कहते हैं, जिसमें अपराध करने वाले से सवाल करने के बजाय पीड़िता को ही दोष दिया जाता है. पाकिस्तान में महिलाओं का सोशल मीडिया पर होना खतरा है?इस सवाल का सीधा जवाब हां या ना में देना सही नहीं होगा.शमसो बीबी के मामले में अभी यह साबित नहीं हुआ है कि उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटी हत्या की वजह थी. वहीं सना यूसुफ और क्वेटा की किशोरी के मामले बताते हैं कि महिलाओं की ऑनलाइन मौजूदगी कुछ मामलों में हिंसा और पारिवारिक टकराव से जुड़ चुकी है.असल समस्या शायद टिकटॉक या इंस्टाग्राम नहीं है. समस्या पाकिस्तान की सोच की है जिसमें महिला की आजादी को पुरुष के अधिकार, परिवार की इज्जत और समाज के बनाए नियमों से जोड़ दिया जाता है.पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर