कोरोनावायरस की चुनौती से निपटने के लिए सरकार उठा रही है एहतियाती कदम, सदानंद गौड़ा ने कही ये बात...
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 05 Mar 2020 4:00 PM
कोरोनावायरस ने भारत में अब तक करीब 30 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. सरकार ने दुनियाभर में उसके फैलने के साथ ही चुनौतियों का सामना करने के लिए एहतियात बरतना शुरू कर दिया था. अब जबकि यह महामारी भारत में फैलने लगी है, तो सरकार ने तमाम तरह के एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है. मंगलवार को पैरासिटामोल समेत अन्य दवाओं और 26 एपीआई के निर्यात पर रोक लगा दी गयी है. गुरुवार को केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने दावा किया है कि कोरोनावायरस की चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार के पास सभी प्रकार के इंतजाम मौजूद हैं.
अहमदाबाद : रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गुरुवार को दावा किया कि कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए सरकार कई एहतियाती कदम उठा रही है और देश में दवाओं और उसके कच्चे माल की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में इस बीमारी के असर को पूरी तरह रोकने के लिए सभी तरह के कदम उठाये जा रहे हैं. गौड़ा ने कहा कि देश में दवाओं के विनिर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल (एपीआई) की कोई कमी नहीं है. हमारे पास देश में पर्याप्य मात्रा में दवा और उसका कच्चा माल उपलब्ध है.
गौड़ा यहां दवा उद्योग पर पांचवी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन औषधि विभाग, गुजरात सरकार और उद्योग मंडल फिक्की ने किया था. उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों के लिए दवा क्षेत्र का उत्पादन बनाये रखने के लिए कच्चे माल की कोई कमी नहीं है. ‘हमारी सरकार देश में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सभी तरह के कदम उठा रही है. अभी यह चिंता की बात नहीं है.’ गौड़ा ने कहा, ‘कोरोना वायरस एक चुनौती है और हम इससे निपटने की जरूरत के मुताबिक सभी प्रयास कर रहे हैं.’
बता दें कि मंगलवार को सरकार ने पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवाओं समेत 25 अन्य एपीआई और दवाओं के देश से निर्यात पर रोक लगा दी थी. सरकार ने यह फैसला देश में कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद दवाओं की कमी को रोकने के सिलसिले में किया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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