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केजरीवाल को केंद्र से लगा झटका : घर-घर राशन योजना पर मोदी सरकार ने लगाई रोक, हफ्ते भर बाद लागू होनी थी स्कीम

Updated at : 05 Jun 2021 6:57 PM (IST)
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केजरीवाल को केंद्र से लगा झटका : घर-घर राशन योजना पर मोदी सरकार ने लगाई रोक, हफ्ते भर बाद लागू होनी थी स्कीम

Mukhya Mantri Ghar Ghar Ration Yojna दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को केंद्र की ओर से बड़ा झटका लगा है. केंद्र सरकार ने केजरीवाल सरकार की महत्वाकांक्षी घर-घर राशन योजना पर रोक लगा दी है. यह योजना एक हफ्ते बाद लागू होनी थी. केजरीवाल सरकार की ओर लागू किए जाने वाले इस स्कीम के तहत दिल्ली में राशन को हर घर तक पहुंचाने की योजना थी. बता दें कि राशन योजना के नाम को लेकर भी केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी हो चुकी है.

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Mukhya Mantri Ghar Ghar Ration Yojna दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार को केंद्र की ओर से बड़ा झटका लगा है. केंद्र सरकार ने केजरीवाल सरकार की महत्वाकांक्षी घर-घर राशन योजना पर रोक लगा दी है. यह योजना एक हफ्ते बाद लागू होनी थी. केजरीवाल सरकार की ओर लागू किए जाने वाले इस स्कीम के तहत दिल्ली में राशन को हर घर तक पहुंचाने की योजना थी. बता दें कि राशन योजना के नाम को लेकर भी केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी हो चुकी है.

दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने 72 लाख लोगों को उनके घर पर राशन पहुंचाने के लिए योजना बनाई थी. दिल्ली सरकार के सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने कहा है कि इस योजना के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं गई, इसलिए इसपर रोक लगाई गई है. इससे पहले राशन योजना के नाम को लेकर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताते हुए था कि यह योजना केंद्र की योजना नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत आती है. जिसमें कोई भी बदलाव केवल संसद कर सकती है, न कि राज्य. इसलिए दिल्ली सरकार इस योजना का न तो नाम बदल सकती है और न ही इसको किसी और के साथ जोड़ सकती है.

अरविंद केजरीवाल सरकार इस योजना को 25 मार्च को लागू करना चाह रही थी, लेकिन केंद्र की आपत्ति के कारण यह संभव नही हो पाया था. इसके बाद दिल्ली सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर घर-घर राशन योजना रख दिया था. इस योजना के तहत गेहूं के बदले आटा और चावल का पैकेट देने की योजना थी. दिल्ली सरकार की ओर से दावा किया गया था कि घर-घर राशन योजना शुरू होने के बाद लोगों को राशन की दुकान पर आने की जरूरत नहीं पड़ती. सरकार का कहना था कि अगर किसी को 25 किलो गेहूं, 10 किलो गेहूं और 10 किलो चावल की जरूरत होती, तो 25 किलो की पैकिंग में गेहूं या आटा और दस किलो चावल की एक बोरी बनाकर उसके घर पहुंचा दिया जाता.

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