Forest Right: वन भूमि पर दावे खारिज करने के लिए दिए जा रहे हैं कई कारण

राज्य प्रशासन विभिन्न कारणों से दावों को खारिज कर देता है. इसमें प्रमुख कारण दिया जाता है कि 13 दिसंबर 2005 से पहले भूमि कब्जा नहीं होना, एक ही भूमि पर कई दावे, गैर-वन भूमि पर दावे, सबूतों की कमी अन्य पारंपरिक वन निवासी (ओटीएफडी) निवास की तीन पीढ़ियों आदि को साबित नहीं कर पाना प्रमुख है.
Forest Right: आदिवासी वर्षों से जंगलों से आजीविका चलाते रहे हैं. समय के साथ वन भूमि कम होने और सरकार का नियंत्रण होने के कारण आदिवासियों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए वन अधिकार कानून(एफआरए) बनाया गया. इसके तहत आदिवासियों को वन अधिकार देना है. राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश को दावों के आधार पर जमीन देना होता है. लेकिन देखा जा रहा है कि प्रशासन विभिन्न कारणों से दावों को खारिज कर देता है. इसमें प्रमुख कारण दिया जाता है कि 13 दिसंबर 2005 से पहले भूमि कब्जा नहीं था. इसके अलावा एक ही भूमि पर डुप्लिकेट दावे, गैर-वन भूमि पर दावे, सबूतों की कमी अन्य पारंपरिक वन निवासी (ओटीएफडी) निवास की तीन पीढ़ियों आदि को साबित नहीं कर सकना प्रमुख है.
केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय समय-समय पर राज्य सरकारों से अनुरोध करता है कि उप-मंडल स्तरीय समिति (एसडीएलसी) और जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) दावेदारों को उनके दावों के समर्थन में सरकारी दस्तावेज प्रदान करने में जरूरी सहायता मुहैया करा सकती है. इसके अलावा केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पोर्टल, पर सिविल सोसाइटी संगठन और लोगों की ओर एफआरए, 2006 के उल्लंघन, बाघ रिजर्व से संबंधित मुद्दे उठाए जाते हैं. मंत्रालय अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बने नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई के लिए शिकायतों को संबंधित राज्य सरकार, केंद्रशासित प्रदेश को भेजता है और उचित कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश भी जारी करता है.
लोगों को जागरूक करने का हो रहा है प्रयास
जनजातीय कार्य मंत्रालय समय-समय पर एफआरए जागरूकता अभियान चलाता रहता है. वर्ष 2024 में जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर मंत्रालय ने पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर सभी राज्य में पहचाने गए ग्राम पंचायतों, गांवों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के लिए पेसा और एफआरए गांवों में एक विशेष ग्राम सभा सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया. इसके अलावा राज्य सरकारों को यह भी सलाह दी गई है कि वे राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत राज्य वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर के एक भाग के रूप में पेसा और एफआरए पर प्रशिक्षण को शामिल करें और इन विषयों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें. जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों से मिले प्रस्तावों के आधार पर राज्य स्तर पर 17 एफआरए प्रकोष्ठों, जिला स्तर पर 324 एफआरए प्रकोष्ठों, उपमंडल स्तर पर 90 एफआरए प्रकोष्ठों को मंजूरी दी है. बिहार में जिला स्तर पर 17 और झारखंड में 24 एफआरए सेल को मंजूरी मिली है. लोकसभा में यह जानकारी केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री ने दी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




