Energy: बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव से निवेश की संभावना हुई बेहतर

Updated at : 19 Mar 2026 6:02 PM (IST)
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Energy: बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव से निवेश की संभावना हुई बेहतर

भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में देश और राज्य की ऊर्जा जरूरतों और संभावना पर मंथन किया जा रहा है. चार दिन तक चलने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में बिहार फोकस स्टेट के तौर पर शामिल है. फोकस स्टेट के तौर पर बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को सामने लाने का काम किया और कई निवेशक राज्य में निवेश की संभावना तलाश रहे हैं.

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Energy: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 का आगाज गुरुवार को हुआ. चार दिन तक चलने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में बिहार फोकस स्टेट के तौर पर शामिल है. सम्मेलन में राज्यों की ओर से राज्यों की ओर से प्रदर्शनी भी लगायी गयी है. फोकस स्टेट के तौर पर बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को सामने लाने का काम किया. बिहार पवेलियन में राज्य की ऊर्जा पहलों दिखाया गया है. बीएसपीएचसीएल की कोर टीम ने मौके पर मौजूद रहकर निवेशकों और आगंतुकों के साथ संवाद की संभावित सहयोग और निवेश पर मंथन किया. इस दौरान कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों के बैठक कर भविष्य की परियोजनाओं पर चर्चा की गयी.

अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव को लेकर विभिन्न देशों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों राज्य की ऊर्जा नीतियों और इसके विकास को समझने का प्रयास किया. कई विदेशी निवेशकों ने आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा जतायी. बिहार पवेलियन का उदघाटन राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया. इस दौरान ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे. गौरतलब है कि पिछले दो दशक में बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलवा आया है.

वर्ष  2005 में राज्य को 700 मेगावाट से भी कम बिजली उपलब्ध होती थी, वहीं मौजूदा समय में 8700 मेगावाट से अधिक की मांग पूरी की जा रही है. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का काम किया गया है और  2.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ता नेटवर्क से जुड़ चुके हैं. ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के कारण राज्य की वितरण कंपनियों के कामकाज भी बेहतर हुआ है. राज्य की बिजली वितरण कंपनियां मुनाफा कमा रही है. 


ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक काे दिया जा रहा है बढ़ावा


ऊर्जा सेवाओं के डिजिटलीकरण में बिहार तेजी से काम कर रहा है और लगभग 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं. इससे पारदर्शिता और राजस्व संग्रह बेहतर हुआ है. साथ ही ईआरपी सिस्टम, एकीकृत आईटी डैशबोर्ड और केंद्रीकृत कमांड सेंटर जैसे  आधुनिक पहल से पूरा सिस्टम अधिक जबावदेह हुआ है. बिहार सरकार अगले पांच साल में टीबीसीबी मोड में 81000 करोड़ रुपये का निवेश की राज्य के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की योजना पर काम कर रही है. इस योजना के तहत 38950 करोड़ रुपये पावर जनरेशन, 16194 करोड़ ट्रांसमिशन को मजबूत करने और 22951 करोड़ डिस्ट्रीब्यूशन तो सशक्त करने पर खर्च होगा. जबकि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए 3346 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सम्मेलन में राज्य की ओर से भविष्य का ऊर्जा विजन पेश किया गया. 


पीरपैंती की लगभग 30000 करोड़ रुपये की परियोजना और कजरा की सौर एवं बैटरी स्टोरेज परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.  पंप्ड स्टोरेज नीति के तहत कुछ ही महीनों में राज्य को 13000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिला है. वहीं रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत बिहार ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 6.1 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है. निवेशकों के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में छूट, ऊर्जा बैंकिंग, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कार्बन क्रेडिट जैसे प्रावधान किए गए है. 

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Vinay Tiwari

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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