एल्गार मामला : फादर स्टैन स्वामी ने जेल में ड्रिंक के लिए मांगी ‘स्ट्रॉ' और 'सिपर', रांची से हुई थी गिरफ्तारी
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 08 Nov 2020 8:21 AM
एल्गार परिषद के कथित माओवादी से संबंध रखने के मामले में गिरफ्तार 82 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Right Activist) फादर स्टैन स्वामी ने यहां एक विशेष अदालत (Special Court) में याचिका दायर करके अनुरोध किया है कि उन्हें पेय पदार्थ पीने के लिए जेल में एक ‘स्ट्रॉ' और ‘सिपर' मुहैया कराया जाए. स्वामी को जनवरी 2018 में पुणे के निकट भीमा कोरेगांव में हिंसा के संबंध में पिछले महीने रांची स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था.
मुंबई : एल्गार परिषद के कथित माओवादी से संबंध रखने के मामले में गिरफ्तार 82 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Right Activist) फादर स्टैन स्वामी ने यहां एक विशेष अदालत (Special Court) में याचिका दायर करके अनुरोध किया है कि उन्हें पेय पदार्थ पीने के लिए जेल में एक ‘स्ट्रॉ’ और ‘सिपर’ मुहैया कराया जाए. स्वामी को जनवरी 2018 में पुणे के निकट भीमा कोरेगांव में हिंसा के संबंध में पिछले महीने रांची स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था.
आरोपी ने वकील कृतिका अग्रवाल के जरिए शुक्रवार को एनआईए अदालत के समक्ष याचिका दायर कर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में स्ट्रॉ और सिपर मुहैया कराए जाने का अनुरोध किया. विशेष अदालत के न्यायाधीश डीई कोठालिकर ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से 26 नवंबर को मामले पर अपना जवाब दायर करने को कहा है.
एनआईए के अधिकारियों ने कहा है कि जांच से पता चला है कि स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में शामिल थे. एनआईए ने आरोप लगाया है कि वह समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए ”षडयंत्रकारियों” सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेन्द्र गैडलिंग, अरुण फरेरा, वर्नन गोंसाल्वेस, हनी बाबू, शोमा सेन, महेश राउत, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े के संपर्क में रहे हैं.
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि स्वामी ने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगी के जरिये धन भी हासिल किया था. इसके अलावा, वह भाकपा (माओवादी) के एक संगठन प्रताड़ित कैदी एकजुटता समिति (PPSC) के संयोजक भी थे. अधिकारियों ने कहा कि उनके पास से भाकपा (माओवादी) से संबंधित साहित्य और प्रचार सामग्री तथा उसके कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए संचार से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. एनआईए ने पिछले महीने स्वामी समेत आठ लोगों के खिलाफ मामले में आरोप पत्र दायर किया था.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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