द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल BJP के सांसदों-विधायकों से की मुलाकात, राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन का मिला आश्वसन

एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने आज पश्चिम बंगाल के सांसदों और विधायकों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए सबका समर्थन मांगा. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पार्टी के सांसदों और विधायकों ने मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने का भरोसा दिलाया.
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के सांसदों और विधायकों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने शीर्ष संवैधानिक पद के लिए 18 जुलाई को होने जा रहे चुनाव में उनका समर्थन मांगा. एक होटल में लगभग एक घंटे चली बैठक में भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे.
भाजपा की बंगाल इकाई के सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पार्टी के सांसदों और विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने का भरोसा दिलाया. आपको बता दें कि सांसदों और विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए मुर्मू विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही हैं. इससे पहले, दिन में वह उत्तरी कोलकाता में स्थित स्वामी विवेकानंद के पैतृक आवास पर पहुंचीं थी.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि अगर भाजपा ने ओडिशा की आदिवासी नेता मुर्मू को चुनाव मैदान में उतारने से पहले विपक्षी दलों के साथ चर्चा की होती तो वह आम सहमति की उम्मीदवार हो सकती थीं. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित देश के प्रमुख गैर-भाजपा दलों ने राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा को विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर पेश किया है. मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल में भाजपा के 17 लोकसभा सांसद हैं. इनमें से एक अर्जुन सिंह तृणमूल में शामिल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है. वहीं, 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के 75 विधायक हैं. हालांकि, उनमें से पांच विधायक पद से इस्तीफा दिए बिना तृणमूल से जुड़े जुके हैं. (भाषा)
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ओड़िशा में सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक से लेकर राजग की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार नामित होने तक का सफर द्रौपदी मुर्मू के लिए बेहद चुनौती भरा रहा है. 20 जून, 1958 को संथाल समुदाय में जन्मीं मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में एक पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया. वह वर्ष 2000 में ओड़िशा सरकार में मंत्री बनीं. बाद में उन्होंने 2015 में झारखंड के पहली महिला राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभाली. 2013 में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था.
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