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President Election: 1957 में दूसरी बार राष्ट्रपति बने डॉ राजेंद्र प्रसाद, 4,57,698 वोट से जीते

Updated at : 18 Jul 2022 10:47 AM (IST)
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President Election: 1957 में दूसरी बार राष्ट्रपति बने डॉ राजेंद्र प्रसाद, 4,57,698 वोट से जीते

President Election|Flash Back|डॉ राजेंद्र प्रसाद लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गये. उन्होंने पिछली बार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की. प्रतिद्वंद्वियों की जमानत जब्त हो गयी. उत्तर प्रदेश के विधायकों का वोट मूल्य इस बार भी सबसे ज्यादा रहा.

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President Election|Flash Back|वर्ष 1957 में देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra Prasad) दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने. 12 मई 1957 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था. इससे पहले राष्ट्रपति का चुनाव (President Election) होना अनिवार्य था. 6 मई 1957 को राष्ट्रपति के चुनाव हुए. निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ब्रीफ नोट में बताया गया है कि इस चुनाव में राजेंद्र प्रसाद 4,57,698 मतों के विशाल अंतर से जीते थे.

14 विधानसभा के सदस्यों ने किया मताधिकार का इस्तेमाल

देश में दूसरी बार हुए राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों के अलावा 14 राज्यों के विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. उस वक्त संसद के प्रत्येक सदस्य के 496 वोट थे. राज्य विधानसभाओं के जनप्रतिनिधियों के वोट का मान अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग था.

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उत्तर प्रदेश के विधायकों के मतों का मूल्य सबसे ज्यादा

पहले राष्ट्रपति चुनाव की तरह दूसरे राष्ट्रपति चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के विधायकों के मतों का मान सबसे ज्यादा था. इस बार यूपी के विधायकों के वोट का मूल्य 147 था. मतों का न्यूनतम मूल्य इस बार जम्मू-कश्मीर के विधायकों का था. इनके वोट का मूल्य सिर्फ 59 था. बता दें कि दूसरे चुनाव में भी मतों के मूल्य की गणना 1951 की जनगणना के आधार पर ही हुई थी.

तीन उम्मीदवार थे मैदान में

इस बार हुए राष्ट्रपति चुनाव में मैदान में मुख्य रूप से तीन उम्मीदवार थे. डॉ राजेंद्र प्रसाद को दूसरी बार बेहद आसानी से जीत हासिल हो गयी. उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले दो अन्य उम्मीदवारों के नाम नागेंद्र नारायण दास और चौधरी हरी राम था. राजेंद्र बाबू को 4,59,698 वोट मिले थे, जबकि उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे नागेंद्र नारायण दास को महज 2,000 और चौधरी हरी राम को 1,498 वोट मिले थे.

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लगातार दूसरी बार निर्वाचित घोषित हुए डॉ राजेंद्र प्रसाद

राजेंद्र बाबू लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित घोषित कर दिये गये. 10 मई 1957 को उनकी जीत की अधिसूचना जारी कर दी गयी. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 13 मई 1957 को दूसरी बार राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया. इस वर्ष चुनाव की प्रक्रिया 6 अप्रैल से 10 मई 1957 तक चली थी. अधिसूचना 6 अप्रैल को जारी की गयी और मतों की गणना 10 मई को हुई थी.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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