सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर रोक से भड़के मनमोहन सिंह, कहा- नहीं थी इसकी जरूरत

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan singh) ने सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के भत्ते (dearness allowance) काटने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के भत्ते काटने को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस वक्त केंद्रीय कर्मियों एवं सैनिकों के लिए मुश्किल पैदा करना उचित नहीं है.
कांग्रेस की ओर से जारी पार्टी के सलाहकार समूह की बैठक के वीडियो के मुताबिक सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस वक्त इन सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के साथ खड़े रहना है। सिंह हाल ही में गठित कांग्रेस सलाहकार समूह के अध्यक्ष हैं। इस समूह की बैठक एक दिन के अंतराल पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होती है. उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों के साथ खड़े होना है जिनके भत्ते काटे जा रहे हैं. मेरा मानना है कि इस वक्त सरकारी कर्मचारियों और सशस्त्र बलों के लोगों के लिए मुश्किल पैदा करने की जरूरत नहीं थी.
बैठक में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ तो सेंट्रेल विस्टा परियोजना पर पैसे खर्च हो रहे हैं और दूसरी तरफ मध्य वर्ग से पैसे लिए जा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि यह पैसा गरीबों को दिया जा रहा है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि सरकार को कर्मचारियों को भत्ते कम करने के बजाय सरकार को सेंट्रल विस्टा परियोजना और दूसरे गैरजरूरी खर्च रोकने चाहिए.
कांग्रेस ने केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार के कदम को ‘जले पर नमक छिड़कने वाला’ फैसला करार देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को सैनिकों और कर्मचारियों के भत्ते काटने के बजाय ‘सेंट्रल विस्टा’, बुलेट ट्रेन परियोजनाओं और फिजूल खर्च पर रोक लगानी चाहिए. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का निर्णय संवेदनहीन और अमानवीय है. उन्होंने ट्वीट किया कि लाखों करोड़ रुपये की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना और सेंट्रल विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने के बजाय कोरोना वायरस महामारी से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का संवेदनहीन तथा अमानवीय निर्णय है.
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By Amitabh Kumar
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