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Delhi Liquor Scam:सिसोदिया को जमानत मिलने के बाद भी आसान नहीं है आम आदमी पार्टी की राह

Updated at : 09 Aug 2024 7:04 PM (IST)
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मनीष सिसोदिया

आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने 17 महीने बाद जमानत देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आम आदमी पार्टी ने स्वागत किया. पार्टी का मानना है कि इसी आधार पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी जमानत मिल सकती है. लेकिन सिसोदिया के जमानत मिलने के बाद भी आगे की राह पार्टी के लिए आसान नहीं है.

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ब्यूरो, नयी दिल्ली :

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आप नेता मनीष सिसोदिया को आखिरकार शराब घोटाले में 17 महीने बाद जमानत मिल गयी है. आप में दो नंबर की हैसियत रखने वाले सिसोदिया की जमानत से पार्टी में उत्साह है और पार्टी को उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल को भी इस मामले में जल्द राहत मिल सकेगी. लेकिन सिसोदिया की रिहाई के बावजूद आप पार्टी के लिए राह आसान नहीं हैं. पहले के मुकाबले दिल्ली की सियासत में काफी बदलाव आ चुका है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन के बावजूद दिल्ली की सभी सात सीटों पर भाजपा चुनाव जीतने में कामयाब रही. वहीं हरियाणा में आप और कांग्रेस का गठबंधन टूट चुका है. ऐसे माहौल में सिसोदिया की रिहाई के बावजूद आम आदमी पार्टी को विशेष लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. भले ही आप पार्टी के नेता सिसोदिया की रिहाई को बड़ी विजय के तौर पर पेश करने कोशिश कर रहे हैं. लेकिन आने वाले समय में पार्टी को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा. लोकसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के फैसले के बाद पार्टी को उम्मीद थी कि सहानुभूति का लाभ पार्टी को मिलेगा. लेकिन पंजाब में भी आप को सिर्फ तीन सीटों से संतोष करना पड़ा. चुनाव नतीजों से केजरीवाल की छवि को बड़ा धक्का लगा. 

क्या जेल से ही चलेगी दिल्ली सरकार

शराब घोटाले में पहली गिरफ्तारी मनीष सिसोदिया की हुई थी. उस दौरान पार्टी ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को राजनीतिक बताते हुए सिसोदिया का इस्तीफा लेने से इंकार कर दिया. लेकिन फिर सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हुई और पार्टी को सिसोदिया का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा. पार्टी की ओर से भले ही सिसोदिया के खिलाफ किसी तरह के सबूत नहीं होने का दावा किया जाता रहा, लेकिन अदालत में जमानत याचिका खारिज होती रही. इस बीच शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया. केजरीवाल की गिरफ्तारी के बीच सिसोदिया का मामला दब गया और पूरी पार्टी केजरीवाल के पक्ष में खड़ी होती दिखी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत भी मिली, लेकिन चुनावी परिणाम अपेक्षित नहीं आने के बाद विपक्षी दलों के बीच केजरीवाल की स्वीकार्यता को लेकर सवाल भी उठे. दिल्ली में अगले साल के शुरू में विधानसभा चुनाव होना है. लेकिन आम आदमी पार्टी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है. ऐसे में सिसोदिया को जमानत देने के फैसले के बाद भी पार्टी को कई स्तर पर चुनौती का सामना करना होगा. 

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Vinay Tiwari

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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