Delhi Election 2025: आरक्षित सीटों पर जीत से तय होता है सत्ता का रास्ता

Edited by Vinay Tiwari
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दिल्ली की कुल 70 सीटों में से 12 सीटें दलित वर्ग के लिए आरक्षित है और अन्य सीटों पर भी दलित मतदाता हार-जीत में भूमिका निभाते हैं. अभी तक अधिकांश आरक्षित सीट जीतने वाले दल को ही दिल्ली की सत्ता मिली है.

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Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल हर वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रहे है. आम आदमी पार्टी मुफ्त के वादों की घोषणा के जरिए चौथी बार सरकार बनाने की जुगत है. वहीं कांग्रेस और भाजपा भी समाज के हर वर्ग को साधने के लिए वादे कर रहे हैं. सभी दलों की नजर दलित वोटरों को साधने की है. दिल्ली की कुल 70 सीटों में से 12 सीटें दलित वर्ग के लिए आरक्षित है और अन्य सीटों पर भी दलित मतदाता हार-जीत में भूमिका निभाते हैं. अभी तक अधिकांश आरक्षित सीट जीतने वाले दल को ही दिल्ली की सत्ता मिली है. वर्ष 1993 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में 13 आरक्षित सीटें थी, जिसमें भाजपा को 8, कांग्रेस को पांच सीट पर जीत मिली और भाजपा के मदनलाल खुराना मुख्यमंत्री बने.

इसके बाद वर्ष 1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस सभी 12 आरक्षित सीट जीतने में कामयाब रही और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनी. इसके बाद वर्ष 2003 और 2008 के चुनाव में कांग्रेस 10 और 9 आरक्षित सीट जीतने में कामयाब रही. लेकिन आम आदमी पार्टी के उभार के बाद आरक्षित सीटों पर आप ने वर्चस्व स्थापित कर लिया. वर्ष 2013 में आप 9 आरक्षित सीट जीतने में कामयाब रही और कांग्रेस के सहयोग से पहली बार सरकार बनायी. इसके बाद वर्ष 2015 और वर्ष 2020 के चुनाव में आप सभी आरक्षित सीटों पर जीती और प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने में कामयाब रही. ऐसे में इस बार भाजपा और कांग्रेस की नजर आरक्षित सीटों पर पकड़ बनाने की है. 


दलित मतदाताओं को साधने की रणनीति पर है विशेष फोकस

इस बार के चुनाव में भाजपा ने दलित वर्ग को साधने के लिए विशेष रणनीति अपनायी है. झुग्गी वासियों का समर्थन हासिल करने के लिए विस्तारक अभियान चलाया गया, जिसके तहत पार्टी नेताओं ने झुग्गी प्रवास कर लोगों की समस्या जानने की कोशिश की और युवाओं के लिए रोजगार मेले का आयोजन किया. यही नहीं संघ भी इन क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहा है. दलित वर्ग के हित में केंद्र सरकार के उठाए गए कदमों की जानकारी लोगों को पहुंचाने का काम किया गया. पार्टी ने जहां झुग्गी, वहां मकान मुहैया कराने के वादे का जमकर प्रचार किया है. प्रधानमंत्री ने चुनाव की घोषणा से पहले 1600 से अधिक झुग्गी वासियों को फ्लैट की चाबी सौंपकर यह संदेश देने का काम किया कि भाजपा इस वर्ग के उत्थान के लिए काम कर रही है.

वहीं कांग्रेस संविधान बदलने और गृह मंत्री अमित शाह के बयान को आधार बनाकर दलित वर्ग को साधने की कवायद में जुटी है. आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि उसकी मुफ्त योजनाओं के कारण दलित वर्ग पार्टी से दूर नहीं जाएगा. आम आदमी पार्टी चुनाव से पहले विदेश में पढ़ने वाले दलित छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की घोषणा कर इस वर्ग को साधने की कोशिश की है. दिल्ली में मंगोलपुरी, मादीपुर, सीमापुरी, त्रिलोकपुरी, सुल्तानपुर माजरा, गोकुलपुर, बवाना, पटेल नगर, कोंडली, अंबेडकर नगर, देवली और करोल बाग आरक्षित सीट है. 

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